माघ पूर्णिमा पर बन रहा रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग, इस तिथि पर शुभ समय में किया गया दान-पुण्य होता है बेहद फलदायी
खबर सार :-
सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार एक फरवरी को माघ मास की पूर्णिमा तिथि पड़ रही है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और रवि पुष्य योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस तिथि पर शुभ समय में किया गया दान-पुण्य बेहद फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन देवगण धरती पर आते हैं और प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं।
खबर विस्तार : -
माघ पूर्णिमा : हिंदू पंचांग के अनुसार, 1 फरवरी को माघ मास की पूर्णिमा तिथि पड़ रही है, जिसे माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह दिन रविवार को है और इस पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ रवि पुष्य योग का विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे में शुभ कार्य, पूजा-पाठ, दान और स्नान के लिए यह तिथि बेहद फलदायी मानी जा रही है। हालांकि, रविवार को भद्रा और राहुकाल जैसे अशुभ कालों से बचना भी जरूरी है।
शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है यह समय
रविवार को पूर्णिमा तिथि है, जो 2 फरवरी की सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। पुष्य नक्षत्र रात 11 बजकर 58 मिनट तक है, इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र होगा। 1 फरवरी को चंद्रमा खुद की राशि कर्क में संचरण करेंगे। सूर्योदय 7 बजकर 9 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजे होगा। शुभ योग और मुहूर्त की बात करें तो इस दिन रवि पुष्य योग सुबह 7 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 58 मिनट तक रहेगा और सर्वार्थ सिद्धि योग भी इसी समय तक है।
ये योग सभी प्रकार के कार्यों में सफलता दिलाने वाले माने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट, अभिजित मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट, विजय मुहूर्त 2 बजकर 23 मिनट से 3 बजकर 7 मिनट तक है। अमृत काल शाम 5 बजकर 59 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। ये समय शुभ कार्यों के लिए उत्तम माने जाते हैं।
अशुभ समय का भी रखें ध्यान
अशुभ समय का ध्यान रखना भी जरूरी है। राहुकाल दोपहर 4 बजकर 39 मिनट से शाम 6 बजे तक, भद्रा सुबह 7 बजकर 9 मिनट से शाम 4 बजकर 42 मिनट तक है। यमगंड दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 56 मिनट तक है। इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें।
सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा का है विशेष महत्व
सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह माघ मास की अंतिम पूर्णिमा होती है, जब कल्पवास (एक माह का पवित्र निवास) पूरा होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवगण धरती पर आते हैं और प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं। पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना, नर्मदा में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं, पुण्य की प्राप्ति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस दिन स्नान कर दान-पुण्य बेहद पुण्यदायी माना जाता है। पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा, दान, व्रत और सत्यनारायण कथा करने से धन-धान्य, सुख-समृद्धि और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पद्म पुराण जैसे ग्रंथों में इसे हजारों अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्यदायी बताया गया है।
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