महाशिवारात्रि स्पेशल : पाताल लोक से जुड़े हैं बाबा दुग्धेश्वर महादेव, स्पर्श मात्र से मिलती है श्रद्धालुओं को कष्टों से मुक्ति
खबर सार :-
देशभर में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। शिवमंदिरों में इस पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यूपी के देवरिया जिले के रुद्रपुर कस्बे में स्थित दुग्धेश्वर महादेव मंदिर की उत्पत्ति गाय के दूध से हुई मानी जाती है। इस शिवलिंग की जड़ें पाताल लोक से जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि दुग्धेश्वर महादेव के स्पर्श दर्शन और दूध अर्पित करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
खबर विस्तार : -
Mahashivaratri Special : 15 फरवरी को देशभर के शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि का त्योहार पूरे उत्साह से मनाया जाने वाला है और उसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसी कड़ी में हम आपके लिए ऐसे शिव मंदिर की जानकारी लेकर आए हैं जिसकी उत्पत्ति गाय के दूध से हुई है और इस अद्भुत शिवलिंग की जड़ें पाताल लोक से जुड़ी हैं। खास बात ये है कि मंदिर सिर्फ अध्यात्म का केंद्र नहीं बल्कि राजनीति से भी जुड़ा है।
अनोखा है गर्भगृह में मौजूद ये शिवलिंग
हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, उसका नाम है दुग्धेश्वर महादेव मंदिर, जो कि उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर कस्बे में बना है। मंदिर हजारों साल पुराना बताया जाता है और मंदिर को लेकर भक्तों की मान्यता भी उतनी ही मजबूत है। माना जाता है कि दुग्धेश्वर महादेव के स्पर्श दर्शन और दूध अर्पित करने से जीवन के सारे कष्ट मिल जाते हैं और शारीरिक रोगों से भी मुक्ति मिलती है, लेकिन खास बात ये है कि मंदिर के गर्भगृह में मौजूद ये शिवलिंग अनोखा है क्योंकि उसका आकार बाकी शिवलिंग से बिल्कुल अलग है।
खंडित चट्टान की तरह दिखता है मंदिर में स्थापित शिवलिंग
मंदिर में स्थापित शिवलिंग दिखने में खंडित चट्टान की तरह दिखते हैं और इस रूप को चंडलिंग अवतार माना जाता है। इसका कनेक्शन उज्जैन के महाकाल से है। माना जाता है कि दुग्धेश्वर महादेव बाबा महाकाल के उप-रूप हैं, जिनके दर्शन करने से ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने जितना ही पुण्य मिलता है। इसलिए जो भक्त बाबा के दर्शन के लिए उज्जैन नहीं जा पाते हैं, वे देवरिया के दुग्धेश्वर महादेव के दर्शन जरूर करते हैं।
दुग्धेश्वर महादेव को कहा जाता है पाताल का राजा
18 एकड़ में बने दुग्धेश्वर महादेव के दर्शन करना भी आसान नहीं है क्योंकि महादेव जमीन से नीचे की तरफ 15 फीट पर स्थिति हैं और उनके दर्शन के लिए सीढ़ियों से नीचे उतकर जाना होता है। जमीन से नीचे की तरफ स्थापित होने की वजह से दुग्धेश्वर महादेव को पाताल का राजा कहा जाता है। माना जाता है कि शिवलिंग की जड़ें पाताल लोक से जुड़ी हैं।
बहुत अद्भुत है मंदिर की पौराणिक कथा
मंदिर की पौराणिक कथा भी बहुत अद्भुत है। कहा जाता है कि सालों पहले एक गोपालक की गाय इसी स्थान पर आकर रोजाना दूध देती थी। जब गोपालक ने गाय का पीछा किया तो पता चला कि इस जगह पर वो दूध देती है, वहां दिव्य शक्ति स्थापित है। बाद में उसी स्थान पर स्वयंभू दुग्धेश्वर महादेव प्रकट हुए। उसी दिन से बाबा पर दूध चढ़ाने की परंपरा चली आई है।
महाशिवरात्रि पर होता है बाबा का विशेष शृंगार
शिवरात्रि, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में मंदिर में मेले का आयोजन होता है और बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर बाबा का विशेष शृंगार होता है और भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए बाबा पर गाय का शुद्ध दूध अर्पित करते हैं।
अन्य प्रमुख खबरें
-
हल छठ 2026ः संतान की दीर्घायु के लिए माताएं रखती हैं व्रत
2026-09-01
-
Aaj Ka Rashifal 1 September 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-08-31
-
Panchang 1 September 2026: मंगलवार 1 सितंबर 2026 का पंचांग
2026-08-31
-
टोरंटो में बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, कहा-हमारे पूर्वजों ने धर्म परिवर्तन नहीं कराया
2026-08-31
-
Kajri Teej: कजरी तीज व्रत से सुहागिन को मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
2026-08-31
-
Aaj Ka Rashifal 31 August 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-08-30
-
Panchang 31 August 2026: सोमवार 31 अगस्त 2026 का पंचांग
2026-08-30
-
400 हाथों में लगी मेहंदी, महिलाओं ने गाए सिंधी गीत
2026-08-29
-
Aaj Ka Rashifal 30 August 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-08-29
-
Panchang 30 August 2026: रविवार 30 अगस्त 2026 का पंचांग
2026-08-29
-
Aaj Ka Rashifal 29 August 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-08-28
-
Panchang 29 August 2026: शनिवार 29 अगस्त 2026 का पंचांग
2026-08-28
-
रक्षाबंधन पर बाबा 'महाकाल' को बंधी गई पहली राखी
2026-08-28
-
Aaj Ka Rashifal 28 August 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-08-27
-
Panchang 28 August 2026: शुक्रवार 28 अगस्त 2026 का पंचांग
2026-08-27