West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। इसी बीच भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता सरकार के सत्ता में आने के बाद राज्य में हिंदू-मुस्लिम विभाजन बढ़ा है और इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया।
मिथुन चक्रवर्ती ने एक साक्षात्कार में कहा कि बंगाल में पहले इस तरह का सांप्रदायिक विभाजन देखने को नहीं मिलता था। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी के सत्ता संभालने के करीब एक से डेढ़ साल बाद से यह स्थिति बनने लगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पहले कभी बंगाल में इस तरह खुले तौर पर हिंदू-मुस्लिम राजनीति की चर्चा होती थी? उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में दो समुदायों के बीच दूरी पैदा कर वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश की गई। उनके बयान ने चुनावी माहौल में नई बहस छेड़ दी है।
भाजपा नेता ने देशभर में खानपान की आज़ादी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में लोग अपनी पसंद से भोजन करते हैं और सरकार उनके निजी जीवन में दखल नहीं देती। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ धार्मिक स्थलों पर विशेष कारणों से प्रतिबंध हो सकते हैं, लेकिन इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
मिथुन चक्रवर्ती ने यह दावा किया कि भले ही बंगाल के मुसलमान पारंपरिक रूप से भाजपा को वोट नहीं देते रहे हों, लेकिन इस बार बदलाव संभव है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भाजपा को समर्थन दिया है और बंगाल में भी ऐसा देखने को मिल सकता है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियां चरम पर हैं। इस दौरान मिथुन ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी “टीएमसी हटाओ” का नारा नहीं सुनती, बल्कि “भाजपा हटाओ” पर जोर देती है। उनके अनुसार, इससे साफ होता है कि विपक्ष भाजपा से कितना डरता है और जनता अब इन रणनीतियों को समझने लगी है।
मुख्यमंत्री बनने या चुनाव लड़ने के सवाल पर मिथुन चक्रवर्ती ने अपनी सीमित राजनीतिक महत्वाकांक्षा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जीवन में बहुत सम्मान मिल चुका है और वे खुद को किसी एक क्षेत्र में सीमित नहीं करना चाहते। उनका यह बयान बताता है कि वे फिलहाल सक्रिय राजनीति में सीमित भूमिका ही निभाना चाहते हैं।
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने भी ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन टीएमसी लगातार उस पर सवाल उठा रही है। मंगल पांडेय ने आरोप लगाया कि पहले प्रशासन और पुलिस के दुरुपयोग से चुनाव प्रभावित किए जाते थे, लेकिन इस बार चुनाव आयोग की सख्ती के कारण ऐसा संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और ममता बनर्जी को यह एहसास हो चुका है। पेट्रोलियम उत्पादों की संभावित कमी पर उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और देश में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से क्षेत्रीय और सांस्कृतिक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन इस बार चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दों, पहचान की राजनीति और धार्मिक ध्रुवीकरण जैसे विषय प्रमुखता से उभर रहे हैं। भाजपा जहां आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में है, वहीं टीएमसी अपने विकास और क्षेत्रीय पहचान के एजेंडे पर भरोसा जता रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
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