Formula 1 India Return 2027 : भारत के खेल प्रेमियों और रफ्तार के दीवानों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने संकेत दिए हैं कि साल 2027 तक भारत में दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित कार रेसिंग प्रतियोगिता, फॉर्मूला वन (F1), की वापसी हो सकती है। सरकार उन बाधाओं को दूर करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है, जिनकी वजह से एक दशक पहले इस खेल का सफर भारत में थम गया था।
सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान खेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) पर दोबारा रेस आयोजित करने की संभावनाएं तलाश रही है। मांडविया के अनुसार, इस रेस को व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार अगले छह महीनों में एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी। खेल मंत्री ने कहा, "हमारा लक्ष्य 2027 में भारत में फॉर्मूला वन रेस आयोजित करना है। इसके लिए टैक्स संबंधी जटिलताओं को सुलझाने और बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।"
गौरतलब है कि भारत में 2011 से 2013 के बीच 'इंडियन ग्रां प्री' का सफल आयोजन हुआ था, लेकिन टैक्स विवादों और प्रशासनिक अड़चनों के कारण इसे बंद करना पड़ा। उस समय सरकार ने इसे खेल के बजाय 'मनोरंजन' की श्रेणी में रखा था, जिससे वित्तीय बोझ बढ़ गया था। अब मांडविया ने आश्वासन दिया है कि सरकार आयोजकों को टैक्स में राहत देने और प्रोजेक्ट को किफायती बनाने के लिए मदद करेगी।
वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए खेल मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभरा है। उन्होंने बताया कि F1 की वापसी से पहले सरकार 'मोटो जीपी' रेस को सफलतापूर्वक आयोजित करने की योजना बना रही है, जो फॉर्मूला वन के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
हालांकि, भारत में फॉर्मूला वन की वापसी की राह इतनी आसान भी नहीं दिखती, क्योंकि इसके सामने कई तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां मौजूद हैं। वर्तमान में F1 के ग्लोबल कैलेंडर में पहले से ही 24 रेस शामिल हैं और दुनिया के कई अन्य देश भी इस हाई-प्रोफाइल रेस की मेजबानी के लिए कतार में खड़े हैं। इसके अलावा, एक रेस के आयोजन की लागत भी काफी अधिक होती है, जो सालाना 2 करोड़ से 6 करोड़ डॉलर तक जा सकती है। इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय बाजार की संभावनाओं को कतई नकारा नहीं जा सकता।
एक आंकड़े के अनुसार, भारत में फॉर्मूला वन के लगभग 7.9 करोड़ प्रशंसक हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े संभावित बाजारों में से एक बनाता है। साथ ही, इस खेल में अब कॉर्पोरेट जगत की दिलचस्पी भी बढ़ती दिख रही है; विशेषकर अडानी ग्रुप द्वारा जेपी समूह की संपत्तियों और बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) के अधिग्रहण की खबरों ने इस रेस की वापसी की उम्मीदों को नया बल दिया है। वर्तमान में इस विश्वस्तरीय ट्रैक के संचालन के लिए तीन बड़ी कंपनियों ने अपनी रुचि दिखाई है, जो यह साबित करता है कि बुनियादी ढांचा और बाजार की मांग दोनों ही इस बार भारत के पक्ष में नजर आ रहे हैं।
भारत में मोटरस्पोर्ट्स का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2023 में मोटो जीपी और हैदराबाद में फॉर्मूला ई रेस जैसे बड़े आयोजन शुरू तो हुए, लेकिन निरंतरता नहीं रख पाए। अब केंद्र सरकार की सक्रियता और टैक्स नीतियों में बदलाव के वादे ने खेल प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगा दी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 2027 में भारतीय दर्शक एक बार फिर अपने घरेलू ट्रैक पर रफ़्तार के इस महाकुंभ का दीदार कर सकेंगे।
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