Middle East Crisis: WHO ने बताया अब तक कितना हुआ नुकसान, इस बात पर दिया जोर

खबर सार :-
मध्य-पूर्व में तनाव एक गंभीर स्तर पर पहुँच गया है। 28 फरवरी को, अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के प्रमुख शहरों को निशाना बनाते हुए संयुक्त हवाई हमले किए। जवाबी कार्रवाई में, ईरान ने भी मिसाइलें दागीं। इस गोलाबारी के बीच, बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक लोगों की जानें जा रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस पर एक रिपोर्ट पेश की है।

Middle East Crisis: WHO ने बताया अब तक कितना हुआ नुकसान, इस बात पर दिया जोर
खबर विस्तार : -

Middle East Crisis:  मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष ने मानवीय संकट को भयावह स्तर पर पहुंचा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, ईरान से जुड़े इस संघर्ष के शुरुआती हफ्तों में ही हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और डर का माहौल बना हुआ है।

तीन हजार से ज्यादा लोगों की मौत

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में अब तक करीब 3,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। वहीं, 43 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं और शरणार्थी शिविरों में रहने को विवश हैं। यह आंकड़े इस संकट की गंभीरता को साफ तौर पर दर्शाते हैं।

हनान बाल्खी, जो डब्ल्यूएचओ के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक हैं, ने इस स्थिति को हाल के दशकों के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बताया है। उन्होंने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि लगातार हो रही बमबारी और मिसाइल हमलों के कारण आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को तब हुई, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान के बड़े शहरों पर एयर स्ट्राइक की। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमले किए, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच लगातार गोलाबारी जारी है।

चिकित्सा व्यवस्था ठप

इस हिंसा का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अब तक 116 स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले किए जा चुके हैं, जिससे चिकित्सा व्यवस्था लगभग ठप हो गई है। अस्पतालों में जरूरी दवाओं और उपकरणों की भारी कमी हो गई है, जबकि घायल लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

इसके अलावा, औद्योगिक इकाइयों, आपातकालीन सेवाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शरणार्थी शिविरों में जरूरत से ज्यादा लोगों के पहुंचने से वहां की स्थिति और भी खराब हो गई है। साफ पानी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी देखी जा रही है।

पर्यावरणीय खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष के चलते जैविक, परमाणु और रेडियोएक्टिव विकिरण का जोखिम भी बढ़ गया है, जो पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

डब्ल्यूएचओ ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल संघर्ष विराम की अपील की है। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

मध्य पूर्व का यह संकट अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा मानवीय और वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
 

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