Global Economy: महाशक्तियों की टकराहट ने बढ़ाई अस्थिरता, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति पर गहराता संकट

खबर सार :-
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। महाशक्तियों के बीच टकराव, ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और कूटनीतिक असहमति ने स्थिति को जटिल बना दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो दुनिया को आर्थिक मंदी, महंगाई और अस्थिरता के गंभीर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

Global Economy: महाशक्तियों की टकराहट ने बढ़ाई अस्थिरता, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति पर गहराता संकट
खबर विस्तार : -

Global economic instability: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव को हिला दिया है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग ठप होने से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस पूरे संकट के केंद्र में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ती सैन्य टकराहट है, जिसने वैश्विक संगठनों और देशों के प्रमुखों को खुलकर प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया है।

चीन ने अमेरिका-इजरायल को ठहराया जिम्मेदार

चीन ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने स्पष्ट कहा कि ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान ही इस संकट की ‘जड़’ हैं। उनके अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में जिम्मेदारी से दूरी बनाते हुए कहा कि इस मार्ग से तेल प्राप्त करने वाले देशों को इसकी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी चाहिए। ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेदों को उजागर कर दिया है, खासकर यूरोपीय देशों के साथ।

कीर स्टार्मर ने बुलाई 35 देशों की वर्चुअल मीटिंग

इस बढ़ते संकट के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 35 देशों की वर्चुअल बैठक बुलाने की घोषणा की है। इस बैठक का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा करना है। स्टार्मर ने साफ किया है कि ब्रिटेन युद्ध में शामिल नहीं होगा, लेकिन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास करेगा।

ईयू अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दी चेतावनी

इस बीच, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी चेतावनी दी है कि ईरान की कार्रवाइयों से वैश्विक आर्थिक स्थिरता खतरे में है। उन्होंने स्टार्मर के साथ बातचीत के बाद कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करनी होगी। यूरोप का यह रुख दिखाता है कि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। ऐसे में इसका बंद होना तेल की कीमतों में तेज उछाल, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और महंगाई में वृद्धि का कारण बन सकता है। एशिया और यूरोप जैसे तेल आयातक क्षेत्रों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

ईरान पर लगातार हो रहे हमलों से हालात जटिल

ईरान पर लगातार हो रहे हमलों ने हालात को और जटिल बना दिया है। हाल ही में कमाल खराजी, जो ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और सुप्रीम लीडर के सलाहकार हैं, पर हुए हमले ने तनाव को और बढ़ा दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान में उनके घर पर एयर स्ट्राइक हुई, जिसमें उनकी पत्नी की मौत हो गई और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। ईरानी मीडिया ने इसे ‘हत्या की कोशिश’ बताया है। तेहरान, इस्फाहान और शिराज जैसे शहरों पर लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे नागरिक ढांचे को भी भारी नुकसान हुआ है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि 100 साल पुराने 'ईरानी पाश्चर इंस्टीट्यूट' को भी निशाना बनाया गया, जिसे वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला बताया जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी सक्रिय कर दिया है। ईरान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य वैश्विक संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील की है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं।

वैश्विक बाजारों पर दिख रहा तनाव का असर

भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। शेयर बाजारों में गिरावट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और निवेशकों की अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो दुनिया एक नए आर्थिक मंदी के दौर में प्रवेश कर सकती है। इस बीच, खाड़ी देशों और वैश्विक शक्तियों के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का समाधान आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमें कई शक्तिशाली देशों के रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं।

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