Ayodhya Ram Mandir Controversy : 1250 ऐतिहासिक श्रीराम शिलाएं लापता, संतों का फूटा गुस्सा, चंपत राय की मुश्किलें बढ़ीं

खबर सार :-
Ayodhya Ram Mandir Controversy : अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और कैश के गबन के गंभीर आरोपों के बीच अब आंदोलन काल की 1250 बहुमूल्य राम शिलाएं रहस्यमयी ढंग से गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। संतों के तीखे आक्रोश और एसआईटी की ताबड़तोड़ जांच के बीच कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर सिटिंग जज से जांच की मांग की है।
Ayodhya Ram Mandir Controversy : 1250 ऐतिहासिक श्रीराम शिलाएं लापता, संतों का फूटा गुस्सा, चंपत राय की मुश्किलें बढ़ीं
खबर विस्तार : -

अयोध्या : श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या इस समय एक ऐसे अप्रत्याशित और गंभीर घटनाक्रम के केंद्र में आ गई है, जिसने पूरे देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण के बाद जहाँ देश-विदेश के श्रद्धालु अगाध श्रद्धा के साथ शीश नवा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर के आंतरिक प्रबंधन और चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व संकट खड़ा हो गया है। मंदिर में अर्पित की जाने वाली धनराशि और बहुमूल्य कैश की कथित चोरी एवं हेराफेरी (Embezzlement) का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब दशकों पुराने राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक धरोहरों के गायब होने की सनसनीखेज बात सामने आई है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, देश और दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालुओं द्वारा भेजी गईं लगभग 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाएं (Sacred Bricks) अपने निर्धारित स्थान से नदारद हैं और सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्तमान न्यास प्रबंधन के पास इनका कोई पुख्ता और आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिल रहा है।

इस पूरे मामले ने उस समय एक बेहद तल्ख कानूनी और प्रशासनिक रूप अख्तियार कर लिया, जब जाने-माने हिंदूवादी नेता संतोष दुबे ने स्थानीय पुलिस थाने में एक विस्तृत लिखित शिकायत पत्र सौंपकर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई। इस कानूनी शिकायत में किसी छोटे कर्मचारी पर नहीं, बल्कि 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के कद्दावर महासचिव चंपत राय, प्रमुख न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव और टीनू यादव को सीधे तौर पर नामजद किया गया है। मालूम हो कि टीनू यादव लंबे समय से चंपत राय के निजी सारथी यानी ड्राइवर की भूमिका में रहे हैं और उनकी संलिप्तता के आरोपों ने इस प्रकरण को और भी ज्यादा संदिग्ध बना दिया है। इन सभी रसूखदार व्यक्तियों पर श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने और मंदिर को मिलने वाले गुप्त व खुले चढ़ावे की अकूत धनराशि में सुनियोजित तरीके से हेराफेरी करने के अत्यंत गंभीर आरोप मढ़े गए हैं।

 Ayodhya Ram Mandir Controversy

 ऐतिहासिक और रत्नों से जड़ी शिलाओं का रहस्यमयी ढंग से गायब होना  

इस पूरे वित्तीय विवाद के समानांतर जो नया और डरावना पहलू उजागर हुआ है, उसने संतों और भक्तों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। राम मंदिर आंदोलन के चरम काल के दौरान, जब देश का बच्चा-बच्चा राम काज के लिए समर्पित था, तब मॉरीशस, नेपाल, त्रिनिदाद सहित देश के विभिन्न राज्यों से भक्तों ने पूजित शिलाएं भेजी थीं। बताया जा रहा है कि इन लापता 1250 शिलाओं में से कई शिलाएं सामान्य पत्थर की नहीं थीं, बल्कि वे सोने, चांदी और अत्यंत दुर्लभ रत्नों से पूरी तरह से मढ़ी हुई थीं। सूत्रों के मुताबिक, इनमें सबसे प्राचीन और अलौकिक महत्व की एक शिला मॉरीशस के राम भक्तों ने विशेष रूप से तैयार करवाकर भेजी थी, जबकि मायानगरी मुंबई के एक विख्यात उद्योगपति ने पूर्णतः हीरों से सुसज्जित एक परम कीमती शिला रामलला के चरणों में अर्पित की थी। इस नए खुलासे के बाद इस Ayodhya Ram Mandir Controversy (अयोध्या राम मंदिर विवाद) ने एक वैश्विक स्वरूप ले लिया है। अब अयोध्या के संत समाज और आम नागरिकों के बीच यह ज्वलंत यक्ष प्रश्न तैर रहा है कि इन अमूल्य और ऐतिहासिक धरोहरों का वास्तविक बहीखाता कहाँ चला गया? ये शिलाएं आखिर किसकी कस्टडी (Custody) में सुरक्षित रखी गई थीं और इनकी चौबीस घंटे निगरानी करने वाले सुरक्षा चक्र में इतनी बड़ी चूक कैसे और किसके शह पर हुई?

अयोध्या के प्रतिष्ठित और वरिष्ठ संतों ने इस विषय पर अपना गहरा रोष प्रकट करते हुए स्पष्ट किया है कि वे इस महाघोटाले के विरोध में पूरी तरह सामने आने को तैयार हैं। संतों का दावा है कि मंदिर परिसर और उसके आसपास चढ़ावे तथा अन्य कीमती संपत्तियों की चोरी को अंजाम देने वाला एक बहुत ही शातिर और संगठित गिरोह (Organized Gang) सक्रिय है। वे इस गिरोह के तौर-तरीकों और अंदरूनी मददगारों से जुड़ी कई अहम कड़ियाँ और ठोस इनपुट जांच एजेंसियों को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। यद्यपि पुलिस प्रशासन के पास अब तक कई लिखित शिकायतें आ चुकी हैं, लेकिन प्रशासनिक दबाव या राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण अभी तक इस मामले में मुख्य आरोपियों के विरुद्ध पहली सूचना रिपोर्ट यानी एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की जा सकी है, जिससे जनमानस में असंतोष की भावना लगातार बलवती हो रही है।

 विशेष जांच दल (SIT) की मैराथन छानबीन का दूसरा दिन  

मामले की गंभीरता और चौतरफा उठते सवालों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम यानी एसआईटी (SIT) का गठन किया था। इस विशेष जांच दल ने अयोध्या में अपनी आमद दर्ज कराकर पूरे मामले की कमान अपने हाथों में ले ली है। जांच के दूसरे दिन, एसआईटी के अधिकारियों ने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय कार्यालयों और लेखा विभागों में दबिश देकर दान राशि, रसीद कट्टों, डिजिटल लेन-देन के सर्वर लॉग और अन्य संदेहास्पद दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है। गौर करने वाली बात यह है कि इस Ayodhya Ram Mandir Controversy (अयोध्या राम मंदिर विवाद) की गहराई को भांपते हुए खुद 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' ने ही बीते 13 जून 2026 को सरकार को एक आधिकारिक पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था, ताकि भ्रामक प्रचार और अफवाहों पर पूर्ण विराम लगाया जा सके। हालांकि, वर्तमान में एसआईटी का मुख्य फोकस दैनिक कैश काउंटिंग सिस्टम (Cash Counting System) की खामियों और बैंकों में जमा हुई धनराशि के मिलान पर है, परंतु प्रशासनिक हल्कों से मिल रहे संकेतों के अनुसार, यदि राज्य सरकार अपने कार्यक्षेत्र की शर्तों (Terms of Reference) का विस्तार करती है, तो यह जांच दल इन 1250 गायब हुई श्रीराम शिलाओं के संपूर्ण इनपुट, प्राप्ति रजिस्टर और उनके भंडारण स्थल के रिकॉर्ड की भी परत-दर-परत खुदाई कर सकता है।

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