सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए न्यायाधीश: CJI सूर्यकांत ने दिलाई शपथ, न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर हुई 37

खबर सार :-
सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल न्यायालय की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है। विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए अनुभवी न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति न्यायिक संतुलन, विशेषज्ञता और विविधता को नई मजबूती प्रदान करेगी।
सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए न्यायाधीश: CJI सूर्यकांत ने दिलाई शपथ, न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर हुई 37
खबर विस्तार : -

Supreme court five new judges sworn: देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को पांच नए न्यायाधीश मिले। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने एक औपचारिक समारोह में पांच नए न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनके शपथ ग्रहण के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जो स्वीकृत कुल संख्या के बेहद करीब पहुंच गई है।

शपथ लेने वाले न्यायाधीशों में जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं। इन सभी नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी।

कॉलेजियम की सिफारिश पर लगी मुहर

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 मई और 27 मई को हुई बैठकों में इन नामों की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को इन नियुक्तियों को मंजूरी प्रदान की। नियुक्तियों की औपचारिक घोषणा केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से की। मेघवाल ने बताया कि राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से आवश्यक परामर्श के बाद इन पांचों नामों को सुप्रीम Court के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी। यह नियुक्तियां न्यायपालिका में अनुभव, वरिष्ठता और विविधता को ध्यान में रखते हुए की गई हैं।

न्यायिक अनुभव से समृद्ध हैं नए जज

सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए गए सभी चार न्यायाधीश विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबे समय तक न्यायिक सेवाएं दे चुके हैं और अपने फैसलों तथा प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं।

जस्टिस शील नागू को मई 2011 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और जुलाई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।

जस्टिस श्री चंद्रशेखर जनवरी 2013 में झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। बाद में जनवरी 2025 में उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। न्यायिक क्षेत्र में उनकी निष्पक्षता और संवैधानिक मामलों की समझ की व्यापक सराहना की जाती रही है।

जस्टिस संजीव सचदेवा ने अपने न्यायिक करियर की शुरुआत दिल्ली हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में की थी। अप्रैल 2013 में उनकी नियुक्ति हुई और मार्च 2015 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। जुलाई 2025 में उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

जस्टिस अरुण पल्ली दिसंबर 2013 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने। बाद में अप्रैल 2025 में उन्हें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। उनके पास संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों की गहरी समझ मानी जाती है।

वी. मोहना की नियुक्ति बनी खास चर्चा का विषय

इस नियुक्ति प्रक्रिया में सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की नियुक्ति को लेकर रही। सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहीं वी. मोहना ने संवैधानिक, दीवानी, सेवा और प्रशासनिक कानून से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में पक्ष रखा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति न्यायपालिका को व्यापक अनुभव और नई दृष्टि प्रदान करती है। वी. मोहना की नियुक्ति को न्यायिक विविधता और महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता को मिलेगा बल

पिछले कुछ वर्षों में सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के त्वरित निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है। न्यायपालिका के जानकारों का मानना है कि पूर्ण क्षमता के करीब पहुंचने से संविधान पीठों के गठन और महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई में भी तेजी आएगी। इन नियुक्तियों से सर्वोच्च न्यायालय में विभिन्न राज्यों और उच्च न्यायालयों के अनुभव का प्रतिनिधित्व भी मजबूत हुआ है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

 

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