चंडीगढ़ः पंजाब विधानसभा ने सोमवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस विधेयक में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए आजीवन कारावास और 5 लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का सख्त प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक भावनाओं की रक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
यह विधेयक विशेष रूप से उन संगठित प्रयासों को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है, जिनके जरिए धार्मिक ग्रंथों का अपमान कर समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की जाती है। कानून में बेअदबी को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है। इसके तहत किसी भी स्वरूप को जलाना, फाड़ना, नुकसान पहुंचाना, चोरी करना या किसी भी माध्यम चाहे वह मौखिक, लिखित, संकेतात्मक या डिजिटल हो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना अपराध की श्रेणी में आएगा।
विधानसभा के एक-दिवसीय विशेष सत्र के दौरान इस विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें संत समाज के प्रतिनिधि और विभिन्न धार्मिक संगठनों के नेता भी मौजूद रहे। इस दौरान विधेयक को लेकर व्यापक सहमति देखने को मिली और सभी दलों ने इसे समर्थन दिया।
इस कानून की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि इसमें न केवल मुख्य आरोपी, बल्कि अपराध के लिए उकसाने वाले या उसमें सहयोग करने वाले व्यक्तियों को भी समान रूप से दोषी माना जाएगा और उन्हें भी अधिकतम सजा का प्रावधान लागू होगा। इसके अलावा, यह अपराध संज्ञेय और गैर-समझौतायोग्य होगा, यानी इसमें बिना वारंट गिरफ्तारी संभव होगी और अदालत के बाहर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकेगा।
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच केवल डीएसपी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी ही करेंगे। साथ ही जांच और न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है, ताकि पीड़ित पक्ष को शीघ्र न्याय मिल सके।
राज्य के शिक्षा मंत्री Harjot Singh Bains ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए इसे “न्याय की दिशा में ऐतिहासिक और अडिग कदम” बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून पिछली सरकारों से अलग है और इसमें बेअदबी के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई या समझौते की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।
अपने संबोधन में उन्होंने सिख इतिहास और परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वे केवल एक विधायक के रूप में नहीं, बल्कि उस पवित्र भूमि की आवाज बनकर बोल रहे हैं, जहां 327 वर्ष पूर्व Guru Gobind Singh ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख समुदाय का ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ है।
मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि तथाकथित ‘पंथिक’ सरकारें इस तरह का सख्त कानून बनाने में विफल रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में तो पूर्व सरकारें खुद ही बेअदबी की घटनाओं में संलिप्त रही हैं और बाद में उन्हें स्वीकार भी करना पड़ा।
इस दौरान Bhagwant Mann का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने इस विधेयक को धार्मिक सम्मान और सामाजिक सौहार्द की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने Guru Tegh Bahadur के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर विधानसभा को समर्पित करने की बात कही।
विधेयक में Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee (SGPG) को गुरु ग्रंथ साहिब के सभी स्वरूपों का संरक्षक नियुक्त करने का भी प्रावधान किया गया है, जिससे प्रबंधन और संरक्षण को संस्थागत रूप दिया जा सके।
यह कानून न केवल धार्मिक आस्था की रक्षा के लिए सख्त संदेश देता है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानूनी पारदर्शिता को भी मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक के लागू होने से भविष्य में बेअदबी जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा और समाज में शांति व सद्भाव को बढ़ावा मिलेगा।
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