नई दिल्लीः राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने दिल्ली के जामिया नगर क्षेत्र में दलित महिला के कथित अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और जबरन धर्मांतरण के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए दिल्ली पुलिस को तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी है।
एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान कई लोगों ने उसके साथ लगातार यौन उत्पीड़न किया। साथ ही उस पर धार्मिक दबाव डालने और जबरन धर्मांतरण कराने की भी कोशिश की गई।
महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में एफआईआर की वर्तमान स्थिति, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और एससी/एसटी एक्ट के तहत लगाए गए प्रावधानों, आरोपियों की गिरफ्तारी, मेडिकल और फोरेंसिक जांच, मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता के बयान और उसकी सुरक्षा से जुड़े कदमों की जानकारी मांगी है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता की गोपनीयता, काउंसलिंग और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
एनसीडब्ल्यू ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म, जातीय हिंसा और जबरन धार्मिक दबाव जैसे आरोप बेहद संवेदनशील और गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे मामलों की जांच पूरी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और तेजी के साथ की जानी आवश्यक है ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
आयोग ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा, डराने-धमकाने और मानसिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं। आयोग ने यह भी दोहराया कि कानून के तहत दोषियों को कठोर दंड मिलना चाहिए।
इसी बीच, एनसीडब्ल्यू ने महाराष्ट्र के पुणे में सामने आए कथित एसिड हमले और घरेलू क्रूरता के मामले पर भी स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स को “बेहद विचलित करने वाला” बताते हुए महाराष्ट्र पुलिस से तत्काल और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के अनुसार, आरोपी पति ने विवाहेतर संबंध के शक में अपनी पत्नी के निजी अंगों पर फर्श साफ करने वाला एसिड डाल दिया। आरोप यह भी है कि महिला को कई दिनों तक घर में बंद रखा गया और उसे समय पर इलाज तक नहीं कराने दिया गया। इस घटना ने महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष विजया रहाटकर ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले में तत्काल जांच और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि पीड़िता को आवश्यक चिकित्सा सुविधा, सुरक्षा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
महिला आयोग ने दोनों मामलों को महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा का गंभीर उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर त्वरित न्याय और कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है। आयोग ने पुलिस प्रशासन से कहा है कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और पीड़िताओं को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।
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