नारी शक्ति वंदन अधिनियम: दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इतिहास रचने का आह्वान-प्रधानमंत्री का सभी दलों को पत्र

खबर सार :-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की है। जानिए 2029 चुनावों को लेकर क्या है सरकार का प्लान।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इतिहास रचने का आह्वान-प्रधानमंत्री का सभी दलों को पत्र
खबर विस्तार : -

नयी दिल्ली:  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 16 अप्रैल का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। आगामी विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर होने वाली निर्णायक चर्चा से पूर्व, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बड़ा राजनीतिक और नैतिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को एक व्यक्तिगत पत्र लिखकर इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की भावुक और सशक्त अपील की है। प्रधानमंत्री का यह पत्र केवल एक विधायी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह देश की आधी आबादी को उनके राजनीतिक अधिकार दिलाने के लिए राष्ट्र के नाम एक सामूहिक आह्वान है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का यह विषय किसी एक राजनीतिक दल की जीत या हार का नहीं, बल्कि भारत के भविष्य और लोकतंत्र की मजबूती का है।

 लोकतंत्र को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अवसर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में 16 अप्रैल से शुरू होने वाली चर्चा को "ऐतिहासिक" करार देते हुए लिखा कि यह विशेष सत्र केवल कानून बनाने की एक प्रक्रिया मात्र नहीं है, बल्कि हमारे लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बनाने का एक दुर्लभ अवसर है। प्रधानमंत्री ने पत्र में गहरा विश्वास जताया कि यह वह सटीक क्षण है जब पूरा देश और सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर अपनी उस सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहरा सकते हैं, जिसका वादा पिछले कई दशकों से किया जाता रहा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि वह इस भावना और उद्देश्य के साथ यह पत्र लिख रहे हैं कि हम सब मिलकर आगे बढ़ें, क्योंकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर होने वाली यह चर्चा हमारे लोकतंत्र को और भी अधिक गहराई प्रदान करेगी। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह समय व्यक्तिगत या दलीय हितों से ऊपर उठकर आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाने का है।

 'दल नहीं, देश की बेटियों का सवाल'

प्रधानमंत्री ने सांसदों और राजनीतिक नेतृत्व से आग्रह किया है कि वे इस विधेयक पर चर्चा के दौरान दलगत राजनीति की सीमाओं को लांघकर एक स्वर में अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि चूँकि लगभग सभी राजनीतिक दल लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं, इसलिए अब उस आकांक्षा को वास्तविकता की जमीन पर उतारने का सही समय आ गया है। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यदि 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि एक सुर में इस संशोधन को पारित करते हैं, तो यह वैश्विक स्तर पर भारत की संसदीय गरिमा का एक महान उदाहरण होगा। उन्होंने सांसदों को प्रोत्साहित किया कि वे इस विषय पर अपने मौलिक विचार व्यक्त करें, क्योंकि यह विषय किसी एक व्यक्ति या सरकार की उपलब्धि मात्र नहीं है।

 प्रगति के लिए महिलाओं का नेतृत्व अनिवार्य

समाज की उन्नति के मूल मंत्र को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने पत्र में तर्क दिया कि कोई भी राष्ट्र तब तक विकसित नहीं हो सकता जब तक उसकी महिलाएं केवल सहभागी न होकर निर्णय लेने वाली भूमिका में न आएं। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर खेल के मैदान तक और सशस्त्र बलों से लेकर आधुनिक स्टार्टअप्स तक में भारत की बेटियों की बढ़ती धमक का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' बनाने का स्वप्न तभी साकार होगा जब महिलाएं नीति निर्धारण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने अपने परिश्रम और संकल्प से बार-बार खुद को सिद्ध किया है, अब व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि उन्हें विधायी संस्थाओं में उनका हक दिया जाए।

 कार्यान्वयन की समय सीमा: 2029 का लक्ष्य

विधेयक के कार्यान्वयन को लेकर चल रही अटकलों और चर्चाओं पर विराम लगाते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा इसे जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की है। उन्होंने पत्र में जानकारी दी कि संवैधानिक विशेषज्ञों, कानूनविदों और विभिन्न हितधारकों के साथ गहन परामर्श के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव अनिवार्य रूप से महिला आरक्षण के साथ ही आयोजित किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2023 में जब इस अधिनियम के लिए शुरुआती एकजुटता दिखी थी, वह एक मील का पत्थर था। अब उस यात्रा को उसके तार्किक अंत तक पहुँचाने की बारी है। उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण लागू होने से देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और शासन प्रणाली में जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा। प्रधानमंत्री का पत्र विपक्ष के प्रति एक 'ऑलिव ब्रांच' (शांति और सहयोग का संदेश) की तरह देखा जा रहा है। राजनीति में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी का मुद्दा पिछले तीन दशकों से भारतीय राजनीति के गलियारों में भटकता रहा है। लेकिन अब, प्रधानमंत्री की इस सीधी अपील और 2029 की समय सीमा तय कर देने से इस बात की संभावना प्रबल हो गई है कि भारत की संसद एक ऐतिहासिक बदलाव की साक्षी बनेगी।

 

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