कोलकाताः बीते कई दशकों से कोलकाता के रेड रोड पर ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अजहा के मौके पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्र होकर नमाज अदा करते रहे हैं। यह परंपरा वाम मोर्चा सरकार के समय से चली आ रही थी और तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान भी जारी रही। रेड रोड पर होने वाली इस नमाज में हजारों लोग शामिल होते थे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अक्सर इन आयोजनों में मौजूद रहती थीं।
हालांकि इस बार स्थिति पूरी तरह बदली हुई नजर आई। कोलकाता में कहीं भी खुली सड़कों पर बकरीद की नमाज आयोजित नहीं की गई। प्रशासन ने सभी बड़े धार्मिक आयोजनों को निर्धारित मैदानों और मस्जिद परिसरों तक सीमित रखा। इसके चलते शहर में पिछले वर्षों की तुलना में ट्रैफिक व्यवस्था काफी सुचारु रही और लोगों को जाम जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा।
कोलकाता पुलिस ने बकरीद के मौके पर पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। ब्रिगेड परेड ग्राउंड और उसके आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों और प्रमुख मस्जिदों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई। कानून-व्यवस्था पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद से हवाई निगरानी भी की गई।
प्रशासन का कहना था कि इस बार सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए विशेष रणनीति बनाई गई थी। शहर के प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध होने से बचाने और आम लोगों को परेशानी से दूर रखने के लिए सड़कों पर सामूहिक धार्मिक जमावड़ों की अनुमति नहीं दी गई।
राजनीतिक रूप से भी यह बदलाव काफी चर्चा में रहा। पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री पद संभालने वाले सुवेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के बाद कहा था कि राज्य में सड़कों पर किसी भी तरह के धार्मिक जमावड़े की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने तर्क दिया था कि ऐसे आयोजनों से यातायात प्रभावित होता है और आम जनता को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उनकी इस घोषणा का असर इस बार बकरीद के आयोजन में साफ दिखाई दिया। रेड रोड, जहां वर्षों से ईद की नमाज होती आ रही थी, वहां इस बार नमाज आयोजित नहीं की गई और ब्रिगेड परेड ग्राउंड को वैकल्पिक स्थान के रूप में चुना गया।
दरअसल, पिछले साल भारतीय सेना की पूर्वी कमान, जिसके अधिकार क्षेत्र में रेड रोड आता है, ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए खिलाफत समिति से किसी अन्य स्थान पर नमाज आयोजित करने को कहा था। सेना ने रेड रोड पर बड़े धार्मिक जमावड़े को सुरक्षा दृष्टि से संवेदनशील बताया था।
उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि वह पूर्वी कमान के अधिकारियों से बातचीत कर अनुमति लेने की कोशिश करेंगी। लेकिन बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं और विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। इसके बाद नई सरकार ने सड़क पर धार्मिक आयोजनों को लेकर सख्त रुख अपनाया।
इस बार ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शांतिपूर्ण तरीके से नमाज संपन्न हुई। प्रशासन और पुलिस ने दावा किया कि पूरे आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
कोलकाता में बकरीद की नमाज के आयोजन स्थल में हुआ यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की धार्मिक और प्रशासनिक नीतियों को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। हालांकि फिलहाल प्रशासन इसे ट्रैफिक और सुरक्षा प्रबंधन की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम बता रहा है।
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