बेंगलुरु में ईडी की बड़ी कार्रवाई, साइबर क्राइम और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर हमला, 12 ठिकानों पर छापेमारी

खबर सार :-
बेंगलुरु में प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े मामले के सिलसिले में एक व्यापक अभियान शुरू किया। ED की एक टीम ने कर्नाटक भर में फैले लगभग 12 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।

बेंगलुरु में ईडी की बड़ी कार्रवाई, साइबर क्राइम और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर हमला, 12 ठिकानों पर छापेमारी
खबर विस्तार : -

बेंगलुरुः कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को एक बड़े साइबर क्राइम और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत की जा रही है। ईडी की टीम ने राज्य भर में करीब 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू कर दिया है।

शुरुआती जांच में कई तथ्य आए सामने

यह मामला कथित साइबर अपराधी श्रीकृष्ण उर्फ श्रीकी और उसके सहयोगियों से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई कर्नाटक पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट्स के आधार पर की जा रही है। इन मामलों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइटों की हैकिंग, बिटकॉइन की चोरी, जबरन वसूली और एनडीपीएस एक्ट के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

ईडी की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत तरीके से संचालित किया जा रहा था। आरोपियों द्वारा पहले विभिन्न वेबसाइट्स और डिजिटल वॉलेट्स को हैक किया जाता था। इसके बाद वहां मौजूद क्रिप्टोकरेंसी, विशेष रूप से बिटकॉइन, को चोरी कर लिया जाता था। चोरी किए गए इन डिजिटल एसेट्स को अलग-अलग क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेचा जाता था ताकि उनके स्रोत को छुपाया जा सके।

कई नामों का हो सकता है खुलासा

इसके बाद प्राप्त धनराशि को कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था और लेयरिंग की प्रक्रिया के जरिए पैसे को कई स्तरों पर घुमाया जाता था, जिससे उसकी ट्रैकिंग बेहद कठिन हो जाती थी। अंततः इस अवैध कमाई का उपयोग आरोपी और उनके करीबी लोग अपने निजी लाभ के लिए करते थे।

ईडी की छापेमारी के दौरान कुछ हाई-प्रोफाइल ठिकानों को भी कवर किया गया। इनमें मोहम्मद हारिस नलपड़ और ओमर फारूक नलपड़ के आवास शामिल हैं, जो एनए हारिस के बेटे हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि ये दोनों आरोपी श्रीकृष्ण के करीबी सहयोगी हैं और इस अवैध नेटवर्क से प्राप्त धन के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा ईडी ने अकीब खान से जुड़े एक ठिकाने पर भी छापा मारा। अकीब खान को इस मामले में कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय का प्रत्यक्ष लाभार्थी माना जा रहा है। उनका संबंध राजनीतिक परिवार से बताया जा रहा है, जिससे इस मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

बड़े खुलासे की उम्मीद

छापेमारी के दौरान ईडी ने विभिन्न ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इन सबूतों की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें और यह समझा जा सके कि अवैध धन किस प्रकार विभिन्न माध्यमों से होकर अलग-अलग लोगों तक पहुंचा।

फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और एजेंसी इस मामले को एक बड़े साइबर-फाइनेंशियल नेटवर्क के रूप में देख रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस जांच से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिनमें कई अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है।

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