कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सपाट खुला शेयर बाजार, IT Shares में बिकवाली से बढ़ा दबाव

खबर सार :-

भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सतर्क शुरुआत की। आईटी शेयरों में बिकवाली और एशियाई बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, फार्मा, डिफेंस और इंफ्रा सेक्टर में खरीदारी से बाजार को कुछ समर्थन मिला। आने वाले सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी।
कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सपाट खुला शेयर बाजार, IT Shares में बिकवाली से बढ़ा दबाव

खबर विस्तार : -

Stock market updates:  वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सपाट रही। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया, जिससे प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 8.02 अंक की मामूली गिरावट के साथ 77,086.05 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 सूचकांक 31.60 अंक फिसलकर 24,071.30 पर पहुंच गया।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला रुख

बाजार खुलने के बाद व्यापक बाजार में मिश्रित कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 13 अंक की हल्की कमजोरी के साथ 62,715 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 12 अंक की मामूली बढ़त के साथ 18,915 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक बड़े शेयरों की तुलना में चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में अवसर तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशक सतर्कता बनाए हुए हैं, जिसके कारण बाजार में बड़ी खरीदारी देखने को नहीं मिल रही है।

सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी और मेटल शेयरों पर दबाव

सेक्टोरल आधार पर देखें तो बाजार में स्पष्ट विभाजन दिखाई दिया। निफ्टी मीडिया, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसई और निफ्टी इन्फ्रा सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। दूसरी ओर, आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव सबसे अधिक देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स के अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आई कमजोरी का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखाई दे रहा है। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े शेयरों में मुनाफावसूली ने टेक सेक्टर की धारणा को कमजोर किया है।

इन शेयरों में रही तेजी

सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में ट्रेंट, अदाणी पोर्ट्स, सन फार्मा, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, पावर ग्रिड, बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, इंडिगो, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और भारती एयरटेल शामिल रहे। इन कंपनियों में खरीदारी का रुख निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। विशेष रूप से फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर से जुड़े शेयरों में मजबूती देखने को मिली।

आईटी दिग्गजों में बिकवाली से बाजार पर असर

बाजार में कमजोरी का प्रमुख कारण आईटी क्षेत्र में आई गिरावट रही। इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला। इसके अलावा टाटा स्टील, एचयूएल, एशियन पेंट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, आईटीसी, एमएंडएम और बजाज फाइनेंस भी नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। आईटी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन ने निफ्टी और सेंसेक्स दोनों पर दबाव बढ़ाया, जिससे बाजार की शुरुआत सकारात्मक नहीं रह सकी।

एशियाई बाजारों में गिरावट ने बढ़ाई चिंता

भारतीय बाजार पर एशियाई बाजारों की कमजोरी का भी असर पड़ा। जापान का टोक्यो बाजार, चीन का शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी के चलते अधिकांश एशियाई बाजारों में दबाव बना हुआ है। उधर, अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडेक्स 0.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा, जबकि टेक्नोलॉजी आधारित नैस्डैक 1.32 प्रतिशत गिर गया। एआई थीम वाले शेयरों में कमजोरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल पर नजर

वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में इस समय पश्चिम एशिया के घटनाक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इजरायल द्वारा लेबनान पर हमलों के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी है। हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोनों देशों के बीच शांति वार्ता में प्रगति होने की बात कही है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली। डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.24 प्रतिशत गिरकर 73.66 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.34 प्रतिशत कमजोर होकर 77.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तेल कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है।

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