सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश की धरती ने एक बार फिर अपने एक वीर सपूत को भारत माता की रक्षा में समर्पित कर दिया। जनपद के थाना बंधुआ कला अंतर्गत अलीगंज बाजार के निकट स्थित ग्राम सभा मझना (पूरे बैसी) के निवासी शहीद जवान अखिलेश शुक्ला का पार्थिव शरीर शुक्रवार को जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो हर आंख नम थी और हर दिल गर्व से भरा हुआ था।
शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे जैसे ही ईएमई कोर की टीम सूबेदार प्रशांत कुमार तिवारी के नेतृत्व में शहीद का पार्थिव शरीर लेकर अलीगंज बाईपास पहुंची, वहां का दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। हजारों की संख्या में मौजूद युवाओं और ग्रामीणों ने "भारत माता की जय" और "अखिलेश शुक्ला अमर रहे" के गगनभेदी नारों से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। सेना के विशेष वाहन से पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक गांव ले जाया गया। रास्ते भर ग्रामीणों ने अपने लाडले पर फूल बरसाकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
जैसे ही शहीद का शव उनके घर की दहलीज पर पहुंचा, परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। माता सुषमा शुक्ला और बहनों की करुण पुकार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की पलकें भीग गईं। शहीद की बड़ी बहन प्रियंका, जो दिल्ली पुलिस में सेवारत हैं, और छोटी बहन (सिविल सेवा की तैयारी कर रही) अपने भाई को खोने के गम में डूबी नजर आईं। घर के इकलौते चिराग की असमय विदाई ने पूरे गांव में मातम पसरा दिया।
शहीद अखिलेश शुक्ला के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा गया, जहाँ जनसैलाब के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सपूत को नमन किया। इसके उपरांत, सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ शहीद की अंतिम यात्रा शुरू हुई। इस गौरवपूर्ण और भावुक क्षण में शासन की ओर से उप जिलाधिकारी विपिन द्विवेदी और सीओ सिटी सौरभ सावंत ने उपस्थित होकर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वहीं, राजनीतिक जगत से भाजपा के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश पांडे ‘बजरंगी’, त्रिलोक चंदी, मनीषा पांडे और सपा नेता शकील अहमद सहित जनपद के तमाम स्थानीय नेताओं ने शहीद की पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित कर उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।
अंतिम संस्कार के समय सबसे मार्मिक क्षण वह था, जब सेवानिवृत्त सैनिक पिता राधे कृष्ण शुक्ला ने अपने इकलौते बेटे की चिता को मुखाग्नि दी। एक पूर्व सैनिक पिता के लिए अपने बेटे को कंधा देना और फिर उसे विदा करना हृदय विदारक था। इस दौरान सेना के जवानों ने हवाई फायर कर अपने साथी को अंतिम सलामी दी।
अखिलेश का परिवार हमेशा से राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित रहा है। पिता खुद सेना से सेवानिवृत्त हैं और बड़ी बहन दिल्ली पुलिस में हैं। अखिलेश ने भी इसी परंपरा को निभाते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी इस शहादत को न केवल सुल्तानपुर बल्कि पूरा देश हमेशा याद रखेगा। अंतिम संस्कार के दौरान हजारों की संख्या में पहुंचे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने नम आंखों से अपने 'वीर' को विदाई दी। शहादत का यह गौरव और अपनों को खोने का यह गम, पूरे क्षेत्र के जनमानस की स्मृतियों में लंबे समय तक अंकित रहेगा।
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