पीलीभीत: विक्रमपुर गौशाला में अव्यवस्थाओं के आरोप निकले झूठे, जांच के बाद BDO ने पेश की सच्चाई
खबर सार :-
पीलीभीत के विक्रमपुर गौशाला में अव्यवस्थाओं के आरोप जांच के बाद निराधार पाए गए। बीडीओ बरखेड़ा ने स्पष्ट किया कि गौशाला में चारे की पर्याप्त व्यवस्था है और बीमार गोवंश का उपचार जारी है।
खबर विस्तार : -
पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत स्थित विकासखंड बरखेड़ा की ग्राम पंचायत विक्रमपुर गौशाला पिछले कुछ दिनों से चर्चा का विषय बनी हुई थी। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर गौशाला की बदहाली को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे। हालांकि, अब प्रशासनिक जांच में इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया है। खंड विकास अधिकारी (BDO) ने स्पष्ट किया है कि गौशाला में चारे और सफाई की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त है।
ग्रामीणों ने लगाए थे गंभीर आरोप
बीते कुछ दिनों से विक्रमपुर गौशाला के प्रबंधन पर सवालिया निशान उठाए जा रहे थे। कुछ स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का आरोप था कि गौशाला में गोवंश कई दिनों से बीमारी के कारण तड़प रहे हैं और उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, यह भी दावा किया गया था कि गौशाला में साफ-सफाई का अभाव है और गोवंश को हरे चारे के बजाय केवल सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। इन शिकायतों के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई थी।
ग्राम प्रधान ने आरोपों को बताया निराधार
इन आरोपों पर सफाई देते हुए ग्राम प्रधान ने कड़ा रुख अपनाया है। ग्राम प्रधान का कहना है कि लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। प्रधान ने जानकारी दी कि, "गौशाला में एक गोवंश निश्चित रूप से बीमार और घायल था, लेकिन उसकी अनदेखी नहीं की गई। उसके उपचार के लिए नियमित रूप से पशु चिकित्सकों को बुलाया जा रहा था और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे थे।" उन्होंने यह भी साफ किया कि गौशाला में हरे चारे का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और पशुओं के खान-पान में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है।
बीडीओ की जांच में क्या निकला?
जब यह पूरा मामला उच्च अधिकारियों की जानकारी में पहुँचा, तो विकासखंड अधिकारी (BDO) बरखेड़ा ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और उसे धरातल पर सच्चाई जानने के लिए भेजा। जांच टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के विक्रमपुर गौशाला का औचक निरीक्षण किया, ताकि स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके। इस जांच के दौरान पाया गया कि गौशाला में चारे की कोई किल्लत नहीं है और मौके पर पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध मिला, जिससे ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सूखे भूसे के आरोप गलत साबित हुए। वहीं, पशुओं के स्वास्थ्य की बात करें तो जिस घायल गोवंश को लेकर विवाद था, उसका मेडिकल रिकॉर्ड चेक किया गया। जांच में पुष्टि हुई कि पशु चिकित्सकों द्वारा उसका विधिवत इलाज किया जा रहा है। इसके साथ ही, टीम ने गौशाला के रखरखाव और साफ-सफाई की व्यवस्था को भी संतोषजनक पाया, जिसके बाद प्रशासन ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार करार दिया। खंड विकास अधिकारी (BDO) ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पुष्टि की है कि गौशाला के विरुद्ध फैलायी जा रही खबरें सत्य से परे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन गोवंश के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल, विक्रमपुर गौशाला में स्थिति सामान्य है और गोवंश सुरक्षित हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद उन सभी अफवाहों पर विराम लग गया है जो पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा कर रही थीं।
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