Jagannath Rath Yatra 2026: तीन शुभ संयोग के साथ 'जगन्नाथ रथ यात्रा' की शुरुआत, जानें पूरा शेड्यूल और महत्व
खबर सार :-
Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की विश्व-प्रसिद्ध रथ यात्रा आज, 16 जुलाई 2026 को शुरू हो गई है। इस साल की रथ यात्रा का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि यह 'रवि योग' नामक अत्यंत शुभ खगोलीय संयोग के दौरान शुरू हो रही है।
खबर विस्तार : -
Jagannath Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा तीन शुभ संयोगों के बीच आज से शुरू हो गई है, जो 24 जुलाई तक चलेगी। महाप्रभु जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पूरे देश में उत्सव का माहौल है। भगवान जगन्नाथ के धाम, पुरी के श्रीमंदिर में सुबह से ही विशेष तैयारियां चल रही हैं। सनातन धर्म में ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा का विशेष महत्व है।
यह भव्य रथ यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को शुरू होती है। जिसमें हर कोई शामिल होना चाहता है। माना जाता है कि इस रथ यात्रा में केवल तीन कदम चलने से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान जगन्नाथ की कृपा से पाप, कठिनाइयां, बीमारियां और दुख सब दूर हो जाते हैं। इस पावन अवसर पर उड़ीसा के पुरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। हर कोई भगवान की एक झलक पाने के लिए उत्सुक है।
तीन शुभ संयोग में शुरू हुई जगन्नाथ रथ यात्रा
दरअसल रथ यात्रा के शुभारंभ पर रवि योग, सिद्धि योग और भगवान विष्णु के प्रिय दिन गुरुवार का शुभ संयोग बना है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि बुधवार 15 जुलाई को 11:50 बजे से शुरू हुई थी, जो गुरुवार 16 जुलाई सुबह 08:52 बजे तक है। लेकिन सूर्योदय की तिथि पूरे दिन तक मान्य होती है। आज, इन तीन शुभ संयोग में महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और लाडली बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर सवार होकर शहर में जुलूस निकालते हैं। इस यात्रा के दौरान, भगवान मुख्य मंदिर (श्रीमंदिर) से अपनी मौसी के घर, गुंडिचा मंदिर जाते हैं। गुंडिचा मंदिर, भगवान जगन्नाथ के मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित है।
आध्यात्मिक महत्व और कथाएं
पुर में जगन्नाथ रथ यात्रा का खास महत्व है। रथ यात्रा से कई कथाएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ, अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी (गुंडिचा मंदिर) के घर जाते हैं। इस यात्रा के दौरान, भगवान स्वयं भक्तों के बीच आते हैं ताकि जो लोग मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुँच पाते, वे भी भगवान के दर्शन का सौभाग्य पा सकें। रथ की रस्सी खींचना, स्वयं भगवान के रथ का सारथी बनने जैसा है। जैसे भगवान कृष्ण ने स्वयं अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाई थी, वैसे ही रथ खींचने वाले भक्त इस कार्य के माध्यम से भगवान के साथ सीधा जुड़ाव महसूस करते हैं। माना जाता है कि जो व्यक्ति रथ खींचता है, उसे भगवान के चरणों में स्थान मिलता है और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की ओर बढ़ता है।
Jagannath Rath Yatra 2026 का पूरा शेड्यूल
16 जुलाई – रथ यात्रा
20 जुलाई – हेरा पंचमी
23 जुलाई – संध्या दर्शन
24 जुलाई – बहुडा यात्रा (वापसी यात्रा)
25 जुलाई – सुना बेश (स्वर्ण वेश)
26 जुलाई – अधर पना
27 जुलाई – नीलाद्रि बिजे
पुरी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पुरी प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे कार्यक्रम की निगरानी ड्रोन कैमरों और हजारों सुरक्षाकर्मियों की मदद से की जा रही है। भक्तों के लिए विभिन्न स्थानों पर पानी के स्टेशन और स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। माहौल शंख, झांझ और कीर्तन (भक्तिपूर्ण गायन) की ध्वनियों से गूंज रहा है। यदि आप इस पवित्र अवसर के लिए पुरी नहीं पहुँच सके, तो भी आप घर बैठे भगवान जगन्नाथ का ध्यान कर सकते हैं; इस शुभ 'रवि योग' के दौरान उनका स्मरण करने से जीवन खुशियों से भर जाता है।
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