शारदीय नवरात्र के चौथे दिन देशभर में मां कूष्मांडा की पूजा, दुर्गा सप्तशती के मंत्रों की गूंज

खबर सार :-

नई दिल्ली, शारदीय नवरात्र के चौथे दिन आज देशभर में मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जा रही है। घरों और मंदिरों में तडके से ही भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैैं। देश के नेताओं ने पवित्र पर्व पर देशवासियों को बधाई दी है।
नवरात्र के पावन अवसर पर मां कूष्मांडा की पूजा में लीन रहे भक्त, नेताओं ने दी बधाई

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, नवरात्रि के चौथे दिन आज इस पवित्र अवसर पर देश के बड़े नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। वहीं देवी दुर्गा की आराधना में लाखों श्रद्धालुओं ने सुबह ही मंदिरों में पूजा अर्चना कर ली है। लंबी लाइनों के बीच में खड़े भक्त अपने पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। हाथों पर टोकरी उस पर देवी जी के लिए सुंदर फूल, गंगाजल, सिंगार की सामग्री लिए इतनी जिज्ञासा थी कि बस कितनी जल्दी माता का सिंगार करने को अवसर मिल जाए।

कड़ी धूप में भी शालीनता के साथ लाइन में खड़े रहे

बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं, सभी बड़ी शालीनता के साथ अनुशासन के साथ मंदिरों के बाहर धूप में लाइन में लगे हुए देखे गए हैं। भक्तों में मां कूष्मांडा का स्वरूप देखने की बड़ी इच्छा थी। जीवन में सुख समृद्धि और आरोग्य की कामना लेकर पहुंचे भक्त बड़े उत्साहित रहे। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व माना जाता है। यह 9 दिन तक चलने वाला पर्व रोज एक नई ऊर्जा का संचार लेकर आता है।

घरों में भी लोग बराबर साफ सफाई का ध्यान रखते हैं और प्रातः ही दुर्गा माता की आराधना के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। माना जाता है कि इसका प्रतिदिन पाठ करने से साहस आध्यात्मिक सुरक्षा और समृद्धि प्राप्त होती है। या देवी सर्वभूतेषु लज्जा रूपेड़ जैसे मंत्रों का जाप करने से आत्म बल मिलता है। अच्छे मार्गों पर चल़ने के लिए स्वयं में ज्ञान उत्पन्न होता है। अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने की शक्ति जागती है। 

ग्रंथ में महिषासुर राक्षस पर दुर्गा जी की विजय का वर्णन

 मार्कंडेय पुराण का एक भाग है। इस ग्रंथ में 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं। ग्रंथ में महिषासुर जैसे राक्षसों पर दुर्गा जी की विजय का वर्णन भी है। इसका सही पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। नवरात्र के दिनों में जगह-जगह पर झांकियां सजाई गई है। आर्टिफिशियल पर्वत बनाए गए हैं और पर्वत में कटीली झाड़ियां झाड़ियां में माताजी को रखा गया है। संजीव पर्वत में माता जी के दर्शन करने के लिए भक्तों की लाइन शाम को देखने को मिलती है।

कानपुर, लखनऊ, बनारस, गोरखपुर, अयोध्या, के अलावा कई और बड़े शहरों में ऐसे पर्वत बनाए गए हैं। दर्शन करने के लिए लंबी-लंबी कटारे लग जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार दुर्गा सप्तशती का प्रतिदिन पाठ नवरात्रि के दौरान करने से आध्यात्मिक और व्यक्तिगत लाभ होता है। इसकी पूजा विधि विधान से करना चाहिए। नवरात्रि के शुभ अवसर पर 9 दिन पूजा करते रहने से कल्याण होता है। पारंपरिक विधि से पाठ करना चाहिए वही शाम को आरती गाने से नकारात्मक शक्तियां बाहर चली जाती हैं।  रात्रि के समय भजन कीर्तन का आयोजन होता है। 

श्रद्धालुेगों को बस एक बात कहनी होती है की हर साल यूं ही यह उत्सव मनाया जाए। उनके जीवन में खुशियां बरसती रहे। नवरात्रि के पावन अवसर पर कलाकारों को भी उनका रोजगार मिल जाता है। जो लोग गायन और नृत्य की पारंगत कलाकार हैं, उन्हें इस मौके पर काम मिलता है। रात्रि के समय भजन में तमाम झांकियां बनाते हैं। कई झांकियां तो ऐसी है, जिनको देखकर लोग कई दिनों तक चर्चा करते रहते हैं।

दूर तक बिखरती है कढ़ाई वाले वस़़्त्रों की चमक

रंगीन झालरों के बीच में उनके सितारा कढ़ाई जड़ी बूटियां वाले वस्त्र की शोभा दूर-दूर तक चमकती रहती है। पंडाल में बैठे हुए लोगों को इनसे फरमाइश करनी पड़ती है। इनकी नृत्य में अद्भुत कला का प्रदर्शन देखने को मिलता है। यह कलाकार वृंदावन, मथुरा, बनारस, कोलकाता, ग्वालियर, जबलपुर, अहमदाबाद, और जाने कितनी दूर-दूर से बुलाए जाते हैं। इनकी कला के अलावा जिस पंडाल में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होती हैं वहां की सजावट भी अद्भुत होती है।

देखने के लिए नए-नए पंडाल आ रहे हैं। अत्यधिक वॉटरप्रूफ और झालर का तो क्या कहना सजावट देखते ही बनती है। इसीलिए नवरात्र अपने आप में भव्यता लाने वाला पर्व है। विदेशों में भी नवरात्र पर धूम मची रहती है। हमेशा की तरह इस बार भी उमंग और उत्साह बना हुआ है। 

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