डॉक्टरों की कमी से शाहपुरा बेहाल, इलाज के नाम पर सन्नाटा

खबर सार :-
शाहपुरा के जिला चिकित्सालय में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कांग्रेस ने विरोध जताया। ब्लॉक व नगर कांग्रेस ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर डॉक्टरों की कमी पर नाराजगी जताई। मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

डॉक्टरों की कमी से शाहपुरा बेहाल, इलाज के नाम पर सन्नाटा
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ाः शाहपुरा का जिला चिकित्सालय इन दिनों बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है। “नाम बड़ा और दर्शन छोटे” की कहावत यहां पूरी तरह चरितार्थ होती नजर आ रही है। अस्पताल में मरीजों को इलाज के नाम पर निराशा हाथ लग रही है, जबकि सुविधाएं लगभग नदारद हैं। इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और नगर कांग्रेस कमेटी शाहपुरा ने जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए उपखंड अधिकारी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।

कांग्रेस नेताओं ने जताई नाराजगी

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महावीर कुमावत और नगर कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सेन के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में अस्पताल की अव्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भले ही शाहपुरा को जिला अस्पताल का दर्जा मिल गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत में यहां स्वास्थ्य सेवाएं बेहद कमजोर हैं और सुविधाएं शून्य के बराबर हैं।

ज्ञापन में बताया गया कि अस्पताल में सबसे जरूरी जनरल फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। सोनोग्राफी जैसी बुनियादी जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्राथमिक इलाज के लिए भी लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।

लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल रहा इलाज

स्थिति इतनी गंभीर है कि वृद्ध पेंशनधारक, गरीब और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज घंटों लाइन में लगने के बावजूद बिना इलाज के वापस लौटने को मजबूर हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को करीब 50 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा जाना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बेहद कठिन है। कई मरीज इलाज के अभाव में अपनी बीमारी को झेलते रहते हैं, जिससे उनकी हालत और बिगड़ती जा रही है।

आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि तत्काल प्रभाव से जनरल फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए।

साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि 10 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि इसके बाद होने वाली किसी भी अव्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।

शाहपुरा की जनता अब सवाल उठा रही है कि जब अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और सुविधाएं ही नहीं हैं, तो जिला चिकित्सालय का दर्जा मिलने का आखिर क्या मतलब रह जाता है।
 

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