पीलीभीत में मनरेगा घोटाले का आरोप: बिना काम फर्जी हाजिरी लगाकर धन निकालने का मामला

खबर सार :-
पीलीभीत के बरखेड़ा विकास खंड क्षेत्र में स्थित मकरंदपुर ग्राम पंचायत से जुड़ा एक मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मकरंदपुर ग्राम पंचायत में तैनात एक 'रोजगार सेवक' (रोजगार सहायक) पिछले कई दिनों से MGNREGA योजना के तहत लगातार फर्जी हाजिरी दर्ज कर रहा है।

पीलीभीत में मनरेगा घोटाले का आरोप: बिना काम फर्जी हाजिरी लगाकर धन निकालने का मामला
खबर विस्तार : -

पीलीभीतः उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के विकासखंड बरखेड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मकरंदपुर में मनरेगा के तहत फर्जी हाजिरी लगाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बिना किसी वास्तविक कार्य के ही कागजों में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

सरकारी पैसे गबन करने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में न तो कोई निर्माण कार्य चल रहा है और न ही कोई सड़क या अन्य विकास कार्य धरातल पर दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद मनरेगा के तहत लगातार मजदूरों की हाजिरी दर्ज की जा रही है। आरोप है कि रोजगार सेवक द्वारा कई दिनों से फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी पैसे का गबन किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा खेल पंचायत स्तर पर चल रहा है और इसमें सचिव तथा प्रधान की मिलीभगत भी हो सकती है। उनका आरोप है कि कागजों में विकास कार्य पूरे दिखाए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता में गांव में कोई काम नहीं हो रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकारी योजनाओं में बड़े स्तर पर अनियमितता बरती जा रही है।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले इसी ग्राम पंचायत में तैनात सचिव रूपेश गंगवार से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया था, जिसमें गौशाला में खामियां पाई गई थीं। उस प्रकरण में जिला अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर सचिव को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भुवनेश्वर कुमार को नया सचिव बनाकर चार्ज दिया गया, लेकिन इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है।

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के बाद भी पंचायत में भ्रष्टाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोजगार सेवक द्वारा बिना काम कराए ही फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है, जिससे सरकारी धन का नुकसान हो रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करता है।
 

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