पीलीभीतः जिले की अमरिया तहसील से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। तहसील क्षेत्र में तैनात चिकित्सा अधीक्षक (MOIC) डॉ. अनिकेत गंगवार पर अवैध और फर्जी क्लीनिकों को संरक्षण देने तथा कार्रवाई के नाम पर कथित रूप से “सीलिंग और डी-सीलिंग” का खेल खेलने के आरोप लगे हैं।
यह मामला अमरिया तहसील के सुस्वार गांव से जुड़ा है, जहां लंबे समय से एक कथित फर्जी क्लीनिक संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। ग्रामीणों के अनुसार बिना मान्यता और आवश्यक अनुमति के यह क्लीनिक खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहा था। मामले की शिकायत तहसील अमरिया में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान सीधे जिलाधिकारी से की गई थी।
शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद अमरिया के MOIC डॉ. अनिकेत गंगवार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और क्लीनिक पर छापा मारकर उसे सील कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, मामला तब विवादों में आ गया जब स्थानीय लोगों ने दावा किया कि सील किए जाने के कुछ ही दिनों बाद उक्त क्लीनिक दोबारा खुल गया और वहां फिर से मरीजों का इलाज शुरू हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब क्लीनिक को सील किया गया था तब उसे फर्जी और अवैध बताया गया था, लेकिन बाद में अचानक उसे दोबारा खोलने की अनुमति कैसे मिल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब उन्होंने इस संबंध में MOIC डॉ. अनिकेत गंगवार से सवाल किया तो उनका जवाब था कि क्लीनिक संचालक के पास डिग्री है।
इसके बाद ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि संचालक के पास वैध डिग्री थी तो क्लीनिक को बिना दस्तावेजों की जांच किए सील क्यों किया गया। वहीं यदि क्लीनिक वास्तव में अवैध था, तो उसे दोबारा संचालित होने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। उनका कहना है कि अमरिया क्षेत्र में कई झोलाछाप डॉक्टर और फर्जी क्लीनिक कथित रूप से स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में चल रहे हैं। शिकायत होने पर औपचारिक कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन बाद में कथित रूप से “महीनेदारी” और आर्थिक लेनदेन के बाद वही क्लीनिक दोबारा खुल जाते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की इस कार्यप्रणाली से जनता की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उनका कहना है कि अवैध क्लीनिकों में बिना प्रशिक्षित लोग इलाज कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है।
डीएम के आदेश पर सील किए गए क्लीनिक का दोबारा खुल जाना अब जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं हो रहा है तो इससे सरकारी कार्रवाई की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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