नौतपा की तपिश के बीच भीलवाड़ा में 3100 किलो बर्फ से सजा ‘बाबा बर्फानी’ स्वरूप, भक्त हुए भाव-विभोर
खबर सार :-
जहाँ एक ओर 'नौतपा' की झुलसा देने वाली गर्मी आम लोगों को बेहाल कर रही है, वहीं दूसरी ओर आस्था की एक शीतलता भरी फुहार ने भीलवाड़ा में भक्तों के दिलों को मोह लिया है।
खबर विस्तार : -
भीलवाड़ाः नौतपा की भीषण गर्मी के बीच आस्था और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला। एक ओर जहां तेज धूप और लू ने लोगों को परेशान किया, वहीं दूसरी ओर भक्तों ने अपने आराध्य को शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष आयोजन कर पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना दिया।
पंचमुखी मुक्तिधाम स्थित प्राचीन श्री मसानिया भेरुनाथ मंदिर में भक्तों ने बाबा भेरूनाथ को 3100 किलो बर्फ से सजाकर “बाबा बर्फानी” का दिव्य स्वरूप प्रदान किया। जैसे ही मंदिर परिसर में बर्फ से सजा यह अलौकिक रूप सामने आया, श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और “जय भेरूनाथ” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।
नौतपा के पहले दिन विशेष आयोजन
नौतपा के पहले दिन जब सूर्य की तपिश अपने चरम पर थी, उसी समय भक्तों ने अपने आराध्य को ठंडक पहुंचाने के लिए विशेष सेवा अभियान शुरू किया। किसी ने बर्फ की व्यवस्था की, किसी ने शरबत तैयार कराया तो किसी ने फल-भोग सजाया। देखते ही देखते मंदिर परिसर एक आध्यात्मिक उत्सव स्थल में बदल गया।
इस दौरान बाबा को 108 लीटर शीतल शरबत का भोग भी अर्पित किया गया, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया गया। इसके साथ ही लीची और अन्य शीतल फलों से विशेष श्रृंगार कर भोग लगाया गया।
मंदिर में दिखा अमरनाथ जैसा दृश्य
3100 किलो बर्फ से किए गए इस विशेष श्रृंगार के बाद मंदिर का दृश्य बिल्कुल किसी बर्फीले धाम जैसा प्रतीत होने लगा। सफेद बर्फ की परतों के बीच विराजित बाबा का स्वरूप देखकर श्रद्धालु इसे अमरनाथ जैसा अनुभव बता रहे थे। भक्तों का कहना था कि यह दृश्य आस्था और समर्पण की अद्भुत मिसाल है।
मंदिर परिसर में स्थित बाबा गुप्तेश्वर महादेव मंदिर और शमशान काली मां जगदंबा का भी बर्फ से आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिससे पूरा परिसर और अधिक दिव्य और शांत वातावरण में बदल गया।
हर साल होता है विशेष श्रृंगार
मंदिर पुजारी रवि कुमार सोलंकी ने बताया कि मसाणिया धाम में हर वर्ष नौतपा के दौरान विशेष श्रृंगार किया जाता है, लेकिन इस बार 3100 किलो बर्फ से किया गया यह आयोजन सबसे आकर्षक और भव्य रहा। उन्होंने कहा कि यह परंपरा भक्तों की आस्था और सेवा भाव को दर्शाती है।
श्रद्धालु यश सिंह ने कहा कि यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का बड़ा केंद्र है। उन्होंने बताया कि सुबह से देर रात तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के इस बर्फानी स्वरूप के दर्शन के लिए पहुंचते रहे।
आस्था और सेवा का संदेश
भीषण गर्मी के बीच इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें सेवा, समर्पण और संवेदनाएं भी शामिल होती हैं। भक्तों ने अपने आराध्य को शीतलता प्रदान कर न केवल धार्मिक भावना व्यक्त की, बल्कि सामाजिक एकता और आस्था का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। नौतपा की तपिश के बीच यह आयोजन पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और श्रद्धालु इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बता रहे हैं।
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