भीलवाड़ा: राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा इन दिनों भक्ति के ऐसे सागर में डूबी है कि यहाँ साक्षात वृन्दावन का आभास हो रहा है। अवसर है हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय 'सनातन मंगल महोत्सव' का। महोत्सव के पांचवें दिन आश्रम की धरा उस समय धन्य हो गई जब श्री रैवासा वृन्दावन धाम के अग्रपीठाधीश्वर एवं मूलकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेन्द्रदास देवाचार्य महाराज का दिव्य आगमन हुआ। आश्रम के मुख्य द्वार से लेकर कथा पंडाल तक का वातावरण 'हरि बोल' के जयघोष से गुंजायमान रहा। संतों के सानिध्य और भक्तों के उत्साह ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है।
व्यासपीठ पर विराजमान प्रख्यात कथा वाचक डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर का अभिनंदन करते हुए स्वामी राजेन्द्रदास महाराज ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर का नाम, उनका रूप, उनकी लीलाएं और उनका धाम-ये चारों ही सच्चिदानंद स्वरूप हैं। इनमें कोई भेद नहीं है। महाराज श्री ने आध्यात्मिक गहराई के साथ समझाते हुए कहा, "भगवान की प्राप्ति और उनकी कथा के श्रवण में कोई अंतर नहीं है। जो फल प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण से मिलता है, वही फल सच्ची श्रद्धा से भागवत कथा सुनने मात्र से प्राप्त हो जाता है।" उन्होंने भीलवाड़ावासियों को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि संतों के सानिध्य में ऐसी दिव्य कथा का मिलना दुर्लभ संयोग है।
कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत मार्मिक और रसपूर्ण वर्णन किया गया। जब डॉ. पाराशर ने गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाया, तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर भगवान के लिए 'छप्पन भोग' की भव्य और आकर्षक झांकी सजाई गई। श्रद्धालुओं ने गिरिराज धरण की जय-जयकार करते हुए अपनी आस्था प्रकट की। डॉ. पाराशर ने जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना पुरुषार्थ के ईश्वर की कृपा का अनुभव नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि *"कर्म करना हमारा दायित्व है, और उस कर्म को फलीभूत करना हरि की कृपा है।"*
कथा के दौरान गौरक्षा और गौ सेवा पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. पाराशर ने अपील की कि हर सनातनी को अपने दैनिक जीवन में पहली रोटी गाय के लिए और अंतिम रोटी श्वान (कुत्ते) के लिए निकालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों का क्रोध या श्राप भी वास्तव में भक्त के कल्याण का मार्ग ही प्रशस्त करता है।
हरि शेवा आश्रम में आयोजित इस महोत्सव की विशेषता यह है कि यहाँ केवल कथा का वाचन ही नहीं हो रहा, बल्कि विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान भी समानांतर रूप से अपनी दिव्यता बिखेर रहे हैं। आश्रम के मुख्य द्वार के समीप वृन्दावन से आए 16 कुशल कलाकारों का दल चैतन्यदास के नेतृत्व में 'अखंड हरिनाम संकीर्तन' कर रहा है। भक्ति का यह प्रवाह 24 घंटे अनवरत जारी है, जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए कलाकारों को तीन-तीन घंटे की विशेष पालियों में विभाजित किया गया है। संकीर्तन की इस मधुर ध्वनि से पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय हो गया है।
आश्रम परिसर में अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहाँ 'पंचकुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ' का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ दी जा रही आहुतियों की सुगंध और मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण शुद्ध और सकारात्मक हो गया है। इसके साथ ही श्रीमद् भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस और श्रीचंद सिद्धांत सागर का 'अखंड पाठ' श्रद्धापूर्वक किया जा रहा है। काशी से पधारे विद्वान यज्ञाचार्य कामेश्वरनाथ तिवारी के मार्गदर्शन में चारों वेदों की ऋचाओं का 'वेद पारायण' गूंज रहा है, जो सनातन परंपरा की गहराई को दर्शाता है। प्रतिदिन संध्या काल में रसिकाचार्य कुंजबिहारी शर्मा के निर्देशन में मनमोहक 'रासलीला' का मंचन हो रहा है और उसके पश्चात काशी की तर्ज पर होने वाली भव्य 'गंगा आरती' में सैकड़ों श्रद्धालु सम्मिलित होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।
मेजबान महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने स्वामी राजेन्द्रदास जी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आगमन से भीलवाड़ा की वर्षों पुरानी साध पूर्ण हुई है। उन्होंने इस महोत्सव को कलयुग का सबसे बड़ा उत्सव बताया। इस दौरान उन्होंने दीक्षा ग्रहण करने वाले शिष्यों- इन्द्रदेव, सिद्धार्थ और कुनाल का परिचय कराया, जिन्हें संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मंच पर पठानकोट के महामंडलेश्वर स्वामी शरणानंद महाराज और पंचमुखी दरबार के महंत लक्ष्मणदास त्यागी सहित कई वरिष्ठ संत उपस्थित रहे। उद्योगपति रामपाल सोनी (संगम ग्रुप) सहित शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी आरती में भाग लिया।
महोत्सव का उत्साह अभी और बढ़ने वाला है। मंगलवार को महामंडलेश्वर स्वामी गुरूशरणानंद महाराज (रमणरेती, मथुरा) का सानिध्य प्राप्त होगा। कथा के छठे दिन महारास और रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया जाएगा, जिसमें भव्य झांकियां निकाली जाएंगी। 25 फरवरी (बुधवार) को सुबह 8 बजे 'सनातन शोभायात्रा' निकाली जाएगी। यह यात्रा अयोध्या नगर के दूधाधारी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए हरि शेवा आश्रम पहुंचेगी, जो सनातन एकता का जीवंत उदाहरण पेश करेगी। हरि शेवा आश्रम का यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संस्कार और सेवा का संगम बन गया है। यदि आप भी इस भक्ति गंगा में डुबकी लगाना चाहते हैं, तो 25 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक कथा का लाभ ले सकते हैं।
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