Indian Railways Safety: भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में बीते एक दशक में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, रेल पटरियों में फ्रैक्चर की घटनाएं 92 प्रतिशत तक कम हो गई हैं, जबकि वेल्ड फेल्योर में 93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी प्रगति का संकेत देती है, बल्कि रेलवे में सुरक्षा को लेकर अपनाए गए व्यापक सुधारों का परिणाम भी है।
रेल मंत्री ने एक राष्ट्रीय प्रकाशन में लिखते हुए बताया कि 2014 के बाद, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे संचालन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इसके तहत ट्रैक मॉनिटरिंग, आधुनिक मशीनों का उपयोग, और नियमित निरीक्षण को सख्ती से लागू किया गया।
वैष्णव ने बताया कि वैश्विक स्तर पर रेलवे सुरक्षा का आकलन “प्रति अरब यात्री-किलोमीटर दुर्घटनाओं या मौतों” के आधार पर किया जाता है। इस पैमाने पर जहां यूरोपीय संघ का औसत आंकड़ा लगभग 0.09 है, वहीं भारत ने अपने ‘कंसिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स’ को घटाकर 0.01 तक पहुंचा दिया है। यह सुधार भारत को दुनिया के बड़े रेल नेटवर्क वाले देशों की श्रेणी में एक मजबूत स्थान दिलाता है।
रेल मंत्री के अनुसार, 2014-15 में जहां कंसिक्वेंशियल ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी, वह 2025-26 में घटकर केवल 16 रह गई है। यानी करीब 89 प्रतिशत की गिरावट। इसी दौरान दुर्घटना सूचकांक 0.11 से घटकर 0.01 तक आ गया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि रेलवे नेटवर्क के विस्तार और ट्रेनों की संख्या बढ़ने के बावजूद सुरक्षा मानकों में लगातार सुधार हुआ है।
भारत का रेल नेटवर्क दुनिया के सबसे जटिल नेटवर्क में गिना जाता है, जहां यात्री, मालगाड़ी, उपनगरीय और एक्सप्रेस ट्रेनें एक ही ट्रैक पर चलती हैं। ऐसे में सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होती है। वैष्णव ने इस उपलब्धि को “संरचनात्मक परिवर्तन” बताया, जो केवल छोटे-छोटे सुधारों का परिणाम नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति और निवेश का नतीजा है।
रेलवे में ट्रैक रिन्यूअल, अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग, और हाई-टेक मशीनों के जरिए पटरियों की निगरानी ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। साथ ही, वेल्डिंग तकनीकों में सुधार और बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण ने भी दुर्घटनाओं को कम करने में मदद की है।
वैष्णव ने कहा कि भारत की रेलवे सुरक्षा यात्रा को केवल मौजूदा स्थिति से नहीं, बल्कि सुधार की गति और प्रतिबद्धता के आधार पर देखा जाना चाहिए। यही दृष्टिकोण भारत को धीरे-धीरे दुनिया के अग्रणी रेल नेटवर्क के बराबर ला रहा है।
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