Bada Mangal 2026: हिंदू धर्म में, मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। परिणामस्वरूप, मंगलवार के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करना विशेष महत्व रखता है। इसके अतिरिक्त, ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवारों का महत्व और भी अधिक माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक दिन नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण का उत्सव है। इस साल ज्येष्ठ माह लंबा होने के कारण एक-दो नहीं बल्कि आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वर्ष 2026 में पड़ने वाले 'बड़ा मंगल' को वास्तव में असाधारण माना जा रहा है। दरअसल, 19 वर्षों के अंतराल के बाद एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें सामान्य चार 'बुधवा मंगल' के बजाय आठ 'बुधवा मंगल' होंगे। इसका कारण यह है कि ज्येष्ठ मास, जो आमतौर पर एक महीने का होता है, इस बार दो महीने तक चलेगा। परिणामस्वरूप, बड़ा मंगल की तिथियों की संख्या भी बढ़ गई है।
बड़ा मंगल मुख्य रूप से संकटमोचक हनुमान जी की कृपा पाने के लिए मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से भय, बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। यह दिन शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक है। विशेष रूप से उत्तर भारत में यह पर्व बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह 2 मई से 29 जून तक रहेगा, जिसमें आठ बड़े मंगल पड़ेंगे, जो 5 मई, 12 मई, 19 मई, 26 मई, 2 जून, 9 जून, 16 जून और 23 जून को होंगे। इन सभी दिनों में व्रत, पूजा और दान का विशेष महत्व है।
इतना ही नहीं बड़े मंगल पर सुंदरकांड का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे 11, 21, 31 या 41 दिनों तक किया जा सकता है। ब्रह्म मुहूर्त में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके श्रद्धा से पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।
बड़े मंगल की सबसे खास परंपरा है भंडारा। इस दिन जगह-जगह श्रद्धालु गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं। पूड़ी-सब्जी, हलवा, शरबत और ठंडाई का वितरण किया जाता है। भीषण गर्मी में जल सेवा (प्याऊ) भी लगाई जाती है। यह परंपरा समाज में सेवा, समानता और करुणा का संदेश देती है। बड़ा मंगल केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और परोपकार का भी प्रतीक है। इस दिन की गई भक्ति और सेवा जीवन में सुख, शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार का सीधा संबंध भगवान हनुमान और भगवान राम से जुड़ी घटनाओं से है। कहा जाता है कि इसी माह में दोनों का पहला मिलन हुआ था, जो रामायण का अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग माना जाता है। इसके अलावा, इसी समय हनुमान जी ने लंका दहन कर अपनी शक्ति का परिचय दिया और उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त हुआ। इन घटनाओं के कारण ज्येष्ठ के मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ कहा जाने लगा।
शास्त्रों के अनुसार, बुढ़वा मंगल की जड़ें महाभारत और रामायण काल से जुड़ी हैं; हालांकि, बड़ा मंगल की कहानी उत्तर प्रदेश के शहर लखनऊ से भी गहराई से जुड़ी हुई है। वैसे तो बड़े मंगल सभी जगह मनाए जाते है कि पर लखनऊ में बड़े मंगल को बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि लगभग 400 साल पहले, अवध के मुगल शासक नवाब मोहम्मद अली शाह के पुत्र गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे, जिस स्थिति ने उनकी बेगम को गहरे दुख और संकट में डाल दिया था।
जब हर संभव प्रयास के बावजूद उनका बेटा ठीक नहीं हो पाया, तो कुछ लोगों ने नवाब मोहम्मद वाजिद अली शाह की बेगम को सलाह दी कि वे लखनऊ के अलीगंज में स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में मंगलवार के दिन जाकर पूजा-अर्चना करें। इस सलाह पर अमल करते हुए, उन्होंने ठीक वैसा ही किया जैसा सुझाया गया था; कुछ ही दिनों बाद, उनके बेटे की सेहत में सुधार के लक्षण दिखाई देने लगे।
इस हर्षोल्लासपूर्ण घटना के उपलक्ष्य में, अवध के नवाब और उनकी बेगम ने अलीगंज स्थित पुराने हनुमान मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया यह परियोजना 'ज्येष्ठ' मास के दौरान पूरी हुई। इसके बाद, पूरे लखनऊ शहर में गुड़ और प्रसाद का वितरण किया गया। इसी समय से लखनऊ में बुढ़वा मंगल के दिन भंडारे आयोजित करने, जलपान कराने और प्रसाद वितरित करने की परंपरा की शुरुआत हुई। ऐसा कहा जाता है कि, तब से लेकर अब तक, हर साल ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को शहर भर में विभिन्न स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया जाता है।
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