नई दिल्ली: देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले जांबाज सैन्य अधिकारियों की परंपरा में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनी रणनीतिक सूझबूझ, अदम्य साहस और अनुकरणीय नेतृत्व का परिचय देने वाले कुमाऊं रेजिमेंट के होनहार सैन्य अधिकारी को देश के प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान से नवाजा गया है। राष्ट्रीय राइफल्स की 50वीं बटालियन में तैनात मेजर भार्गव कलिता शौर्य चक्र से सम्मानित किए गए हैं। केंद्र सरकार ने उनके इस बेमिसाल योगदान को भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कारों में से एक देकर सम्मानित किया है, जिससे पूरी सेना और देश गौरवान्वित है।
घाटी में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे खुफिया अभियानों में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है। रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मेजर कलिता अक्टूबर 2022 से ही जम्मू-कश्मीर के सबसे संवेदनशील इलाकों में कई बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण अभियानों की कमान संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर सटीक खुफिया तंत्र विकसित किया। उनके द्वारा डिजाइन किए गए ऑपरेशन्स की बदौलत सुरक्षा बलों ने इलाके में सक्रिय तीन कुख्यात आतंकवादियों को मार गिराने में सफलता हासिल की। इसके अलावा, आतंकियों को रसद, हथियार और पनाह मुहैया कराने वाले चार कट्टर ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को भी सलाखों के पीछे भेजा गया, जिससे घाटी में आतंकी नेटवर्क की कमर पूरी तरह टूट गई। कर्तव्य के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और परिचालन उत्कृष्टता ने पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, असल परीक्षा की वह घड़ी दिसंबर के शुरुआती हफ्ते में आई, जब कड़ाके की ठंड के बीच खुफिया इनपुट्स मिले कि एक बड़ा आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। तारीख थी 2 दिसंबर 2024, जब सेना के कंट्रोल रूम को एक बेहद पुख्ता खबर मिली। सूचना मिलते ही बिना वक्त गंवाए, बेहद अल्प सूचना पर कार्रवाई करते हुए मेजर कलिता ने मोर्चा संभाला। उन्होंने तुरंत एक कट्टर आतंकवादी के सफाए के लिए एक सुनियोजित, नेतृत्वपूर्ण और सटीक घात लगाने की योजना तैयार की। यह ऑपरेशन जितना गोपनीय था, उतना ही खतरनाक भी, क्योंकि मामूली चूक भी पूरी टीम की जान जोखिम में डाल सकती थी।
अंधेरे का फायदा उठाते हुए उन्होंने अपनी टीम को रणनीतिक रूप से तैनात किया। असाधारण क्षेत्र कौशल और सामरिक सूझबूझ का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपनी टीम को इस तरह छिपाया कि परिंदा भी पर न मार सके। पूरी टीम ने पूरी तरह से आश्चर्यचकित करने के लिए पोजीशन ली और बेहद धैर्यपूर्वक आतंकवादी के निर्धारित हत्या स्थल (किलिंग ज़ोन) में प्रवेश करने की प्रतीक्षा करने लगी। यह इंतजार लंबा और थका देने वाला था, लेकिन जांबाज सैनिकों के हौसले के आगे रात की खामोशी भी छोटी पड़ गई।
जैसे ही उस चिन्हित आतंकी ने घेरे में प्रवेश किया, वैसे ही सेना के जवानों ने उसे आत्मसमर्पण करने की चुनौती दी। नजदीकी मुठभेड़ में खुद को चारों तरफ से घिरा देख और चुनौती मिलने पर आतंकवादी ने आपा खो दिया। उसने सुरक्षा बलों पर अपनी स्वचालित राइफल से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरी घाटी गूंज उठी। आतंकी ने इस गोलीबारी की आड़ में घेरा तोड़कर भागने का पुरजोर प्रयास किया।
ऐसी विकट और जानलेवा परिस्थिति में भी कमांडर का हौसला डिगा नहीं। मेजर भार्गव कलिता शौर्य चक्र की गरिमा के अनुरूप बिना विचलित हुए खुद मोर्चे पर डटे रहे और उन्होंने बिल्कुल सटीक गोलीबारी की। उन्होंने अपनी टीम को कुशलतापूर्वक नए सिरे से तैनात करते हुए आतंकी के भागने के सभी संभावित रास्ते पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिए। उन्होंने घात लगाकर बैठे अपने दल को निरंतर कड़ी निगरानी रखने और जवाबी गोलीबारी जारी रखने का स्पष्ट निर्देश दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि वह खूंखार आतंकवादी उसी छोटे से दायरे में फंसकर रह गया और उसे छिपने या भागने की कोई जगह नहीं मिली।
मुठभेड़ काफी लंबी खिंच रही थी और आतंकी लगातार एक पक्के ढांचे की आड़ से गोलियां बरसा रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेजर ने एक ऐसा फैसला लिया जो केवल एक सच्चा नायक ही ले सकता है। असाधारण वीरता का प्रदर्शन करते हुए और अपनी जान की रत्ती भर भी परवाह न करते हुए, वह रेंगते हुए आगे बढ़े। हवा में तैरती मौत की परवाह किए बिना, मेजर कलिता गंभीर खतरे के बीच छिपे हुए आतंकवादी की ओर बेहद खामोशी और तेजी से रेंगते हुए बढ़े।
अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय का परिचय देते हुए उन्होंने अंतिम क्षणों में उस आतंकवादी पर सीधा हमला बोल दिया। दोनों के बीच बेहद नजदीक से भीषण मुठभेड़ हुई। अपनी अचूक निशानेबाजी का परिचय देते हुए मेजर ने उस आतंकी को वहीं के वहीं ढेर कर दिया। बाद में जब सुरक्षा बलों ने शव की तलाशी ली और शिनाख्त की, तो सेना के आला अधिकारी भी हैरान रह गए। मारे गए आतंकवादी की पहचान सुरक्षा बलों की हिट-लिस्ट में शामिल शीर्ष ए++ श्रेणी के आतंकवादी के रूप में हुई। वह दुर्दांत आतंकी सात बेकसूर नागरिकों की नृशंस हत्या और सुरक्षा बलों पर हुए कई घातक और कायरतापूर्ण हमलों का मुख्य सूत्रधार था।
इस सफल और बेहद जोखिम भरे मिशन के सफल समापन ने राष्ट्रीय राइफल्स की साख को और मजबूत किया है। भारतीय सेना की सर्वोच्च और गौरवशाली परंपराओं के अनुरूप, एक अत्यंत महत्वपूर्ण मिशन के निडर निष्पादन के लिए उन्हें याद किया जाएगा। उनकी इस साहसिक योजना, अनुकरणीय नेतृत्व, अदम्य साहस और निर्भीक निष्पादन के कारण ही आज सेना के इस गौरवशाली नायक को सम्मानित किया गया है। निश्चित रूप से, मेजर भार्गव कलिता शौर्य चक्र से सम्मानित होने के बाद देश के युवाओं के लिए देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा के एक महान प्रतीक बनकर उभरे हैं, जिनकी बहादुरी की गाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
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