West Asia Crisis के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत: Fitch ने FY27 के लिए 6.4% जीडीपी वृद्धि अनुमान बरकरार रखा

खबर सार :-
फिच रेटिंग्स ने पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत पर बरकरार रखकर अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। घरेलू मांग, निवेश और स्थिर नीति वातावरण विकास के प्रमुख आधार बने हुए हैं। हालांकि वैश्विक तेल कीमतें, महंगाई और मौसम संबंधी जोखिम चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था मध्यम अवधि में मजबूत विकास पथ पर बनी रहने की संभावना है।
West Asia Crisis के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत: Fitch ने FY27 के लिए 6.4% जीडीपी वृद्धि अनुमान बरकरार रखा
खबर विस्तार : -

Fitch Ratings India GDP:  वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि पर अंतरराष्ट्रीय भरोसा कायम है। प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। एजेंसी का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग के दम पर स्थिर विकास पथ पर बनी रहेगी।

फिच ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि मार्च में किए गए अनुमान की तुलना में यह वृद्धि दर 0.3 प्रतिशत कम है, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।

घरेलू मांग बनी मुख्य विकास इंजन

रिपोर्ट के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा आधार घरेलू मांग है। उपभोक्ता खर्च, निजी निवेश और सरकारी पूंजीगत व्यय आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को गति देते रहेंगे। फिच का मानना है कि शुद्ध बाहरी मांग यानी निर्यात और आयात के बीच संतुलन भी धीरे-धीरे सकारात्मक योगदान देगा, क्योंकि आयात में अपेक्षित कमी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों के मुकाबले अपेक्षाकृत अधिक लचीली है, जिसका कारण मजबूत घरेलू बाजार और बढ़ता मध्यम वर्ग है।

2028 में विकास में आ सकती है तेजी

फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2028 में पश्चिम एशिया संकट में कमी आने के बाद वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होंगी, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि में और तेजी देखने को मिलेगी। इस दौरान मजबूत उपभोक्ता खर्च और निवेश गतिविधियों के चलते जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके बाद वित्त वर्ष 2029 में वृद्धि दर सामान्य स्तर पर लौटते हुए 6.4 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है, जो भारत की दीर्घकालिक स्थिर विकास क्षमता को दर्शाता है।

Global Tension-Crude Oil-India

Oil Prices और वैश्विक जोखिम बने चिंता का विषय

फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक आर्थिक विकास पर दबाव डाल रही हैं। तेल कीमतों में वृद्धि न केवल महंगाई बढ़ाती है, बल्कि निवेश और उपभोक्ता मांग पर भी असर डालती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) खर्च में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को कुछ हद तक सहारा मिल रहा है। विशेष रूप से एशियाई देशों में डिजिटल निवेश आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है।

महंगाई बढ़ने की आशंका, लेकिन नियंत्रण में स्थिति

फिच ने कहा कि भारत में फिलहाल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई बहुत अधिक नहीं है, लेकिन आने वाले महीनों में इसमें बढ़ोतरी की संभावना है। एजेंसी का अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक महंगाई 5.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके पीछे प्रमुख कारणों में ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और खाद्य आपूर्ति पर मौसम का प्रभाव शामिल हैं।

Monsoon और Agriculture क्षेत्र से बढ़ सकता है दबाव

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि सामान्य से कम मानसून और देश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक गर्मी खाद्य उत्पादों की कीमतों को बढ़ा सकती है। इसका सीधा असर महंगाई दर पर पड़ेगा, जिससे उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव भारत की मुद्रास्फीति संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Indian Rupee-GDP Growth

रुपये पर सीमित दबाव की उम्मीद

फिच ने भारतीय मुद्रा रुपये को लेकर अपेक्षाकृत स्थिर दृष्टिकोण रखा है। एजेंसी का कहना है कि इस वर्ष रुपये में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है, हालांकि सीमित उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती और निर्यात प्रदर्शन रुपये को स्थिर बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

RBI और Fitch के अनुमान में अंतर

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत रखा है, जो फिच के अनुमान से थोड़ा अधिक है। आरबीआई के अनुसार, विभिन्न तिमाहियों में वृद्धि दर में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी।

वैश्विक जोखिमों के बीच भारत की मजबूती

केंद्रीय बैंक ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और जलवायु संबंधी झटके विकास दर को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूप से मजबूत बनी हुई है।

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